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15 साल से बंद पड़ी नलजल योजनाएं, परेशान लोगों ने की चालू कराने की मांग, विभाग बेखबर

भास्कर संवाददाता | कुंडेश्वर गर्मी की शुरुआत में ही अस्तौन सहित आसपास के गांवों में पानी की मारामारी शुरु हो गई...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:55 AM IST
भास्कर संवाददाता | कुंडेश्वर

गर्मी की शुरुआत में ही अस्तौन सहित आसपास के गांवों में पानी की मारामारी शुरु हो गई है। लोगों को दूर दराज से पानी लाना पड़ रहा है। अस्तौन में नल जल योजना सालों से बंद पड़ी है। जबकि कलेक्टर के आदेश हैं कि जिन गांवों में नल जल योजना बंद पड़ीं हैं, उन्हें जल्द दुरुस्त किया जाए। इसके बाद भी गांव में आदेश का पालन नहीं हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर नलजल योजनाएं शुरू की जा रही हैं। टंकियों का निर्माण कर राशि भी खर्च हो रही है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते नलजल योजनाएं चालू नहीं हो रहीं।

एेसा ही मामला ग्राम पंचायत अस्तौन का सामने आया है। 15 सौ आबादी वाले गांव में 15 साल पहले पानी की टंकी का निर्माण कराया गया, लेकिन आज तक लोगों को पानी की एक बूंद भी नहीं मिली है। गांव के लोगों ने इसकी शिकायत कई बार पीएचई विभाग के अधिकारियों से की है। ग्रामीणों ने जल संकट को देखते हुए नलजल योजना शुरू करने की मांग की, लेकिन आज तक अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है। अब आलम यह है कि 2 किमी दूर से गांव के लोगों को पानी भरने जाना पड़ता है। मार्च के महीने में ही स्थानीय जलस्रोत सूखने लगे हैं। हैंडपंपों का जल स्तर नीचे खिसकने लगा है। अप्रेल महीने में ही पूरा गांव भीषण जल संकट की चपेट में आ जाएगा। पंचायत स्तर पर भी समस्या से निपटने के लिए उपाय नहीं किए जा रहे हैं। गांव के सत्येंद्र सिंह ने बताया कि 15 साल से टंकी बनकर तैयार खड़ी है, लेकिन आज तक पानी सप्लाई नहीं किया गया। देवेंद्र राजपूत ने बताया कि ग्रामीण हर साल नलजल योजना शुरू होने की उम्मीद लगा लेते हैं, लेकिन अभी तक योजना शुरू नहीं हो सकी है।

पाइप लाइन और कनेक्शन भी नहीं किए

निवाड़ी में नहीं बना बस स्टैंड, सड़क पर खड़ी होती हैं बसें

भास्कर संवाददाता | निवाड़ी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा के बाद निवाड़ी भले ही जिला बनने की कतार में हो, लेकिन यहां सात साल से बस स्टैंड नहीं सका है। यात्री बसों के ठहरने का नगर में कोई स्थान चिन्हित नहीं है। जिसके चलते मुख्य सड़क और झांसी-खजुराहो नेशनल हाइवे पर बसें खड़ी की जा रही हैं। सड़क पर यात्री बसों और ट्रकों के खड़े रहने से हर दिन जाम लग रहा है।

स्थानीय लोगों ने नगर प्रशासन से कई बार बस स्टैंड बनाए जाने की मांग की है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मुख्य सड़कों और नेशनल हाइवे पर जाम लगने से चार पहिया, दो पहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूली बच्चों को भी आने जाने में परेशानी होती है। झांसी-खजुराहो नेशनल हाइवे की दूरी नगर से करीब 2 किमी है। हर दिन 60-70 टैक्सी चालक मनमर्जी से खड़े रहते हैं। टैक्सी चालक गिदखिनी, पिपरा, टीला, टेहरका, असाटी, बिनवारा, तरीचरकलां, सेंदरी, उबौरा, गढ़कुंडार सहित कई गांवों में आवागमन करते हैं। जिसके चलते मुख्य सड़कों पर हर दिन जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। नगर के वार्ड 7 निवासी सतीश मिश्रा ने बताया कि नगर पंचायत द्वारा चार साल पहले टीला रोड के पास जमीन चिन्हित की गई थी, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं किया गया है। जिससे हाइवे, निवाड़ी तिराहा, बायपास रोड, तहसील कार्यालय, मुख्य बाजार सहित मुख्य सड़कों पर घंटों का जाम लगा रहता है। पिछले 15 सालों से नगर के लोग जाम की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं किया गया है।

जल्द शुरू हो स्टैंड का निर्माण

लोगों का कहना है कि ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए जल्द से जल्द बस स्टैंड का निर्माण शुरू होना चाहिए। जिससे यात्री बसों के लिए स्थान चिन्हित हो सके। साथ ही टैक्सी चालकों के लिए भी पार्किंग स्थल चिन्हित किया जाए। जिससे मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति से लोगों को निजात मिल सके। त्यौहारों के मौसम में पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। नगर प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना जरूरी है।

जल्द हल होगी समस्या


ग्रामीणों ने बताया कि नलजल योजना के नाम पर केवल टंकी बनाई गई है। सप्लाई पाइप लाइन नहीं डाली गई। न ही घरों में कनेक्शन किए गए हैं। नलजल योजना शुरू करने के लिए कई बार सरपंच, पीएचई विभाग और जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। किसी अधिकारी ने समस्या का समाधान नहीं किया। हैंडपंप और कुओं में भी पानी नहीं बचा है। ऐसे में गर्मियों के दिनों में पानी की पूर्ति कैसे होगी।