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दलित समाज ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर मंत्रियों का पुतला जलाया

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश जारी करते हुए एससीएसटी एक्ट 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 04:10 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश जारी करते हुए एससीएसटी एक्ट 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में संशोधन किया है। जिस पर पूरे देश के दलित समाज में रोष व्याप्त है। जिसको लेकर शनिवार की दोपहर नगर में सैकड़ों की तादाद में दलित समाज के लोगों ने एकत्र होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार के दलित मंत्रियों का पुतला जलाते हुए पुराने कानून को लागू करने की मांग की। इसके साथ ही राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

अनुसूचत जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग युवा संघ के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष राजू बिछोले के नेतृत्व में दलित समाज सहित अन्य समाज के युवाओं ने दलितों की सुरक्षा व सम्मान के लिए बने कानून एससीएसटी एक्ट में संशोधन करने का विरोध किया। युवकों ने पहले तो केंद्र सरकार में दलित समाज से मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार, रामदास अठावले, थावरचंद्र गहलोत की अर्थी निकालकर तहसील चौराहे पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंककर जमकर नारेबाजी की। इसके बाद तहसील पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार जिया फातिमा को ज्ञापन सौंपा।

नौगांव। दलित समाज के लोगो ने प्रदर्शन करते हुए जलाए मंत्रियों के पुतले।

कानून तोड़कर

संशोधन किया

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि दलितों की सुरक्षा के लिए भारतीय संसद ने एससी एसटी एक्ट अत्याचार निवारण अधिनियम को 11 सितम्बर 1989 को पारित कर कानून का रूप दिया गया। पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय दिल्ली ने 20 मार्च को कानून तोड़कर संशोधन किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून में संशोधन के बाद से अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के अंदर भय व्याप्त हो गया है। उनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। देश में दलित विरोधी ताकतें एक बार फिर से हावी होंगी। देश में अराजकता का माहौल पनपेगा। इन सब कारणों को लेकर संशाेधन कानून में फिर से पुनर्विचार करके पुराने कानून को ही लागू करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान जीतेंद्र अहिरवार, मुकेश अहिरवार, आशीष जाटव, सुशील अहिरवार, बलराम अहिरवार, रामबाबू, राजू अहिरवार, विनय बिछोले, कमलेश कुमार, आकाश वाल्मिक, नितिन कुमार सहित कई समाज के लोग मौजूद रहे।