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त्योहार आते ही शहर में नकली मावे की सप्लाई शुरू

होली का त्योहार आते ही शहर में मिलावटी मावे की भी दस्तक शुरू हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:05 AM IST

त्योहार आते ही शहर में नकली मावे की सप्लाई शुरू
होली का त्योहार आते ही शहर में मिलावटी मावे की भी दस्तक शुरू हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

जिले से लगे कई क्षेत्रों से मावा की कमी को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा इन दिनों सप्लाई किया जा रहा है। ज्यादातर मावा मुरैना एवं यूपी के समीपवर्ती जिलों से आता है। मिलावटी मावा बनाने के लिए यूरिया व डिटर्जेंट पाउडर से तैयार सिंथेटिक दूध से तैयार हो रहा है। शहर में इन दिनों मावा 140-160 रुपए किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि मावा बनाने के लिए 50 रुपए लीटर का लगभग पांच लीटर दूध को उबालने पर एक किलो मावा प्राप्त हाेता है। इसके अलावा मावा बनाने में ईंधन का खर्च अलग होता है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है, कि जो मावा मार्केंट में आ रहा है वह कितना सही है। इस समय शहर में आसपास के इलाकों से लगभग 2 से 3 क्विंटल मावा की सप्लाई की जा रही है।

जिम्मेदारी इन अधिकारियों पर : फूड सेफ्टी ऑफिसर को मिठाई की जांच करने एवं सैंपल लेने का अधिकार है। जांच रिपोर्ट 15 से 20 दिन में आती है। इतने दिन में तो पूरा सीजन ही निकल जाता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए फूड सेफ्टी विभाग को समय-समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। अधिकारी सिर्फ दिखावे के लिए ही कार्रवाई करते हैं। जिन लोगों के मावे के सैंपल लिए जाते हैं उनका बाद में भी कुछ नहीं होता।

सबसे ज्यादा मुरैना से आता है मिलावटी मावा: सबसे ज्यादा मिलावटी मावा मुरैना व उप्र के सटे इलाके मउरानीपुर, बांदा, ललितपुर व झांसी से सप्लाई किया जाता है। वहीं शहर में तखा, सकेरा, कुंडेश्वर ,ओरछा,अस्तोन, कुंडेश्वर, लखौरा, मोहनगढ़, मवई, धजरई से भी मावा की सप्लाई होती है। शहर में त्योहार पर प्रतिदिन 3 क्विंटल से अधिक मावा की सप्लाई की जाती है।

मिलावट खोरी

जिले से लगे कई क्षेत्रों से मावा की कमी को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा इन दिनों किया जा रहा सप्लाई

ऐसे होगी मिलावटी मावे की पहचान

असली मावा पानी में डाला जाए तो आसानी घुल जाता है, और अगर मावा में मिलावट है तो वह पानी में पूरी तरह नहीं घुलेगा।

मिलावटी मावे पर स्प्रिट लगाते ही वह काला हो जाता है, और मावा में मिलावट नहीं है तो स्प्रिट जिस रंग का है, मावा पर भी वहीं रंग आ जाएगा।

भास्कर संवाददाता। निवाड़ी

होली का त्योहार आते ही शहर में मिलावटी मावे की भी दस्तक शुरू हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

जिले से लगे कई क्षेत्रों से मावा की कमी को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा इन दिनों सप्लाई किया जा रहा है। ज्यादातर मावा मुरैना एवं यूपी के समीपवर्ती जिलों से आता है। मिलावटी मावा बनाने के लिए यूरिया व डिटर्जेंट पाउडर से तैयार सिंथेटिक दूध से तैयार हो रहा है। शहर में इन दिनों मावा 140-160 रुपए किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि मावा बनाने के लिए 50 रुपए लीटर का लगभग पांच लीटर दूध को उबालने पर एक किलो मावा प्राप्त हाेता है। इसके अलावा मावा बनाने में ईंधन का खर्च अलग होता है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है, कि जो मावा मार्केंट में आ रहा है वह कितना सही है। इस समय शहर में आसपास के इलाकों से लगभग 2 से 3 क्विंटल मावा की सप्लाई की जा रही है।

जिम्मेदारी इन अधिकारियों पर : फूड सेफ्टी ऑफिसर को मिठाई की जांच करने एवं सैंपल लेने का अधिकार है। जांच रिपोर्ट 15 से 20 दिन में आती है। इतने दिन में तो पूरा सीजन ही निकल जाता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए फूड सेफ्टी विभाग को समय-समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। अधिकारी सिर्फ दिखावे के लिए ही कार्रवाई करते हैं। जिन लोगों के मावे के सैंपल लिए जाते हैं उनका बाद में भी कुछ नहीं होता।

सबसे ज्यादा मुरैना से आता है मिलावटी मावा: सबसे ज्यादा मिलावटी मावा मुरैना व उप्र के सटे इलाके मउरानीपुर, बांदा, ललितपुर व झांसी से सप्लाई किया जाता है। वहीं शहर में तखा, सकेरा, कुंडेश्वर ,ओरछा,अस्तोन, कुंडेश्वर, लखौरा, मोहनगढ़, मवई, धजरई से भी मावा की सप्लाई होती है। शहर में त्योहार पर प्रतिदिन 3 क्विंटल से अधिक मावा की सप्लाई की जाती है।

भास्कर संवाददाता। निवाड़ी

होली का त्योहार आते ही शहर में मिलावटी मावे की भी दस्तक शुरू हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

जिले से लगे कई क्षेत्रों से मावा की कमी को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा इन दिनों सप्लाई किया जा रहा है। ज्यादातर मावा मुरैना एवं यूपी के समीपवर्ती जिलों से आता है। मिलावटी मावा बनाने के लिए यूरिया व डिटर्जेंट पाउडर से तैयार सिंथेटिक दूध से तैयार हो रहा है। शहर में इन दिनों मावा 140-160 रुपए किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि मावा बनाने के लिए 50 रुपए लीटर का लगभग पांच लीटर दूध को उबालने पर एक किलो मावा प्राप्त हाेता है। इसके अलावा मावा बनाने में ईंधन का खर्च अलग होता है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है, कि जो मावा मार्केंट में आ रहा है वह कितना सही है। इस समय शहर में आसपास के इलाकों से लगभग 2 से 3 क्विंटल मावा की सप्लाई की जा रही है।

जिम्मेदारी इन अधिकारियों पर : फूड सेफ्टी ऑफिसर को मिठाई की जांच करने एवं सैंपल लेने का अधिकार है। जांच रिपोर्ट 15 से 20 दिन में आती है। इतने दिन में तो पूरा सीजन ही निकल जाता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए फूड सेफ्टी विभाग को समय-समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। अधिकारी सिर्फ दिखावे के लिए ही कार्रवाई करते हैं। जिन लोगों के मावे के सैंपल लिए जाते हैं उनका बाद में भी कुछ नहीं होता।

सबसे ज्यादा मुरैना से आता है मिलावटी मावा: सबसे ज्यादा मिलावटी मावा मुरैना व उप्र के सटे इलाके मउरानीपुर, बांदा, ललितपुर व झांसी से सप्लाई किया जाता है। वहीं शहर में तखा, सकेरा, कुंडेश्वर ,ओरछा,अस्तोन, कुंडेश्वर, लखौरा, मोहनगढ़, मवई, धजरई से भी मावा की सप्लाई होती है। शहर में त्योहार पर प्रतिदिन 3 क्विंटल से अधिक मावा की सप्लाई की जाती है।

अधिकारियों का क्या कहना

बाजार में मिलावटी मावा का होना शहर के लिए गंभीर मामला है। शहर में सप्लाई हाे रहे मावे पर नजर रखी जा रही है। लोगों को अगर कहीं मिलावटी मावे की खबर मिलती है तो मेरे कार्यालय आकर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एसके तिवारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

मिठाइयों में मिलावटी मावा का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। मिठाई में उपयोेग हाेने वाले रंगों से लोगों को कैंसर तक होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कम से कम मावा और रंग वाली मिठाइयों का उपयोग करें। जिले में समय-समय पर मावा की जांच की जाती है। डॉ. वर्षा राय, सीएमएचओ

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