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परिवहन विभाग ने स्कूल बसों में सीसीटीवी लगाने के निर्देश तो दिए, पर मापदंड तक नहीं किए तय

परिवहन विभाग ने 31 मार्च तक सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। 1 अप्रैल से जिस बस में कैमरे...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:10 AM IST
परिवहन विभाग ने 31 मार्च तक सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। 1 अप्रैल से जिस बस में कैमरे नहीं मिलेंगे उस पर चालान किया जाएगा। विभाग ने नियम तो जारी कर दिया, लेकिन कैमरे की गुणवत्ता और मापदंड निर्धारित नहीं किए, जिसके चलते अब इस नियम को लेकर स्कूल बस संचालक असमंजस में हैं। बस संचालकों को डर है कि कहीं स्पीड गर्वनर में हुए बदलावों की तरह उन्हें कैमरे भी तीन से चार बार न बदलवाने पड़ें।

एक साल में 4 बार बदले स्पीड गवर्नर के नियम: परिवहन विभाग ने स्पीड गवर्नर का नियम लागू करते समय भी ऐसी ही जल्दबाजी दिखाई थी, जिसमें पहले स्पीड गर्वनर को लेकर कोई मापदंड निर्धारित नहीं किए। बाद में एक साल के भीतर चार बार नियमों में फेरबदल हुआ। जिसके चलते हर बार सैकड़ों वाहन मालिकों को नए नियमों के हिसाब से स्पीड गवर्नर लगवाने पड़े। हाल ही में पांचवीं बार गर्वनर में फेरबदल करने की बात सामने आई है। अब इलेक्ट्रॉनिक स्पीड गर्वनर लगाने का नियम जारी होने वाला है।

नियम बदले तो 20 हजार से ज्यादा का होगा नुकसान : बस संचालकों का कहना है कि एक बार सीसीटीवी कैमरे लगाने में 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है। स्पीड गवर्नर के मामले में उन्हें विभाग के इस तरह नियम बदलने से हर बार 5 से 6 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। यदि सीसीटीवी कैमरे लगाने के बाद विभाग ने नए नियम के साथ मापदंड जारी किए तो उन्हें 20 से 25 हजार रुपए की हानि होगी।

जीपीएस सिस्टम की भी अनिवार्यता: परिवहन विभाग ने स्कूल बसों में जीपीएस सिस्टम लगाने को लेकर भी आदेश जारी किए हैं। मॉनीटरिंग स्कूल प्रबंधन के जरिए की जाएगी। वहीं अप्रैल माह से महिला अटेंडर न रखने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है।