• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Sagar
  • एसडीएम ने मृत व्यक्तियों को जिंदा दिखाकर बंटवारे का निर्णय किया निरस्त, पटवारी को भी माना संलिप्त
--Advertisement--

एसडीएम ने मृत व्यक्तियों को जिंदा दिखाकर बंटवारे का निर्णय किया निरस्त, पटवारी को भी माना संलिप्त

आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के दिए निर्देश भास्कर संवाददाता | सागर पिता की मृत्यु 16 और परिवार के...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:10 AM IST
आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के दिए निर्देश

भास्कर संवाददाता | सागर

पिता की मृत्यु 16 और परिवार के सदस्यों की मौत 15 साल पहले होने के बाद राजस्व विभाग की मिलीभगत से हुए बंटवारे को न्यायालय अनुविभागीय दंडाधिकारी ने निरस्त कर दिया है।

मामले में बंटवारा करवाने वालों के साथ ही हलका पटवारी को भी कोर्ट ने संलिप्त मानते हुए वैधानिक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। आवेदक गौरीशंकर पिता रामप्रसाद और करोड़ीलाल पटेल ने पटवारी सहित 27 लोगों के विरुद्ध एसडीएम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि अनावेदकों ने राजस्व विभाग की मिलीभगत से मृत लोगों को जीवित बताकर उनके बयान कराए और एक फर्जी बंटवारानामा तहसील कार्यालय से जारी करा लिया। यह फर्जी है।

इसी के आधार पर चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अधीनस्थ न्यायालय तहसीलदार ने अपने प्रकरण में विधि विरुद्ध आदेश पारित किया। जिसमें तत्कालीन हल्का पटवारी आनंद खत्री की संलिप्तता प्रथम दृष्टया दर्शित हो रही है। इसी आधार पर एसडीएम ने अपील स्वीकारते हुए तहसीलदार न्यायालय के 8 अक्टूबर 2015 के आदेश को निरस्त कर दिया। तहसीलदार सागर पूर्ववत कर रिकॉर्ड दुरुस्त करें।

प्रकरण में संदिग्ध तत्कालीन हल्का पटवारी आनंद खत्री एवं आवेदन प्रस्तुतकर्ता हरगोविंद प्रसाद रामप्रसाद उर्फ अमर सिंह पटेल एवं जयराम पिता भगवानदास पटेल व अन्य जीवित अनावेदकों के विरुद्ध फर्जी दस्तावेजों एवं मृत व्यक्ति गौरीशंकर के फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करने पर उचित वैधानिक कार्यवाही प्रस्तावित की जाती है।

तहसीलदार सागर को संबंधितों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि अनावेदकों ने मामले में कलेक्टर के यहां एसडीएम के फैसले के विरुद्ध भी अपील की है। जिसमें 13 मार्च को सुनवाई तय हुई है।