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संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद से कई देश हुए विकसित: कुलपति

Sagar News - डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में संस्कृत वाग्व्यवहार आधारित ‘लघु अवधि प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम’...

Dainik Bhaskar

Jan 05, 2018, 05:10 AM IST
संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद से कई देश हुए विकसित: कुलपति
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में संस्कृत वाग्व्यवहार आधारित ‘लघु अवधि प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम’ (संस्कृत संभाषणम) का शुभारंभ गुरुवार को कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा में निबद्ध ग्रंथ ज्ञान के भंडार हैं। इनका सदुपयोग हम भारतीयों का नैतिक दायित्व है। इन्हीं ग्रंथों का अनुवाद करके अन्य देशों ने उनसे ज्ञान अर्जित कर अनुसंधान के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए और अपने आप को विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा कर पाने में सफल हुए। संस्कृत भाषा एक वैज्ञानिक भाषा है। सदियों से इस भाषा का प्रयोग हमारे देश में होता आया है। इसके पुन: प्रतिष्ठा की आवश्यकता है। इस पाठ्यक्रम की शुरुआत विवि द्वारा इसी दिशा में किया गया प्रयास है। विशिष्ट अतिथि योग विभाग के अध्यक्ष प्रो. गणेश शंकर गिरि ने कहा कि संस्कृत विभाग विवि का एक समृद्ध विभाग है। यहां से अनेकों विभूतियां निकल कर भारत ही नहीं भारत के बाहर भी अपने ज्ञान का लोहा मनवाती रही हैं। विशिष्ट अतिथि डाॅ. रामरतन पांडे ने कहा संस्कृत माध्यम से वाग्व्यवहार संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक है। कार्यक्रम की संयोजक डाॅ. किरण आर्या ने पाठ्यक्रम की जानकारी दी। इस मौके पर विभाग से प्रकाशित होने वाली संस्कृत शोध पत्रिका ‘सागरिका’ तथा सौन्दर्यशास्त्र एवं रंगमंच की पत्रिका ‘नाट्यम’ के नए अंक का विमोचन भी कुलपति ने किया। डाॅ. रामहेत गौतम और डाॅ. संजय कुमार ने भी अपने विचार रखे। संचालन डाॅ. नौनिहाल गौतम ने किया। आभार डाॅ. शशिकुमार सिंह ने माना।

पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएगा विभाग : प्रो. त्रिपाठी -

विभागाध्यक्ष प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस पाठ्यक्रम की शुरुआत के साथ ही कुलपति ने जो निर्देश दिए हैं, विभाग द्वारा पूरी निष्ठा से उनका निर्वहन किया जाएगा। इस मौके पर संस्कृत विभाग के दो विद्यार्थियों यूजीसी से जेआरएफ पास रवींद्र पंथ और नेट पात्र निकिता यादव को कुलपति ने पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया।

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