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सिर्फ 5 हजार रुपए प्रीमियम पर बांट दी लाखों की दुकानें, एक-एक व्यक्ति ने ले ली 8 से 10

15 से 20 साल पहले नगर निगम द्वारा लीज पर दी गईं 2250 दुकानों के आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नियम कायदों को ताक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:40 AM IST

15 से 20 साल पहले नगर निगम द्वारा लीज पर दी गईं 2250 दुकानों के आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नियम कायदों को ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति के नाम पर और एक ही परिवार में 5-10 दुकानों का अलॉटमेंट किया गया है। दुकानों की प्रीमियम राशि सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे, सिर्फ 5 हजार रुपए में प्रमोटर ऑफर स्कीम के तहत दुकानें रेवड़ी की तरह बांटी गईं। इस फर्जीवाड़े में कुछ पार्षद और बाजार विभाग के तत्कालीन अफसरों का दखल रहा है।

भास्कर की पड़ताल में एेसे लोगों के नाम पता चले हैं, जिनके पास पास एक से ज्यादा दुकानें हैं। प्रताप नामक व्यापारी के पास 8-10 दुकानें बताई जा रही हैं।

इसके अलावा मोहनलाल, मनीष, विजय आदि के पास 3-4 दुकानें हैं। ये दुकानें नया बाजार, निगम मार्केट, बख्शीखाना में है। लाखों रुपए के लेनदेन के चलते कच्ची से पक्की दुकानें बनाने की भी चर्चा है। एक दुकान के तीन-तीन पार्टीशन परिवार में ही लाखों रुपए में बेची गई हैं। कई और खुलासे होना बाकी हैं। निगम चाहे तो हकीकत सबके सामने आ सकती है, लेकिन किसी कारणवश अफसर व जनप्रतिनिधि जानकर भी अंजान बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार 1992 में प्रमोटर ऑफर स्कीम के तहत जयंत नाम के शख्स को दुकानें बनाकर बेचने का काम सौंपा गया था। निगम ने प्रति दुकान प्रीमियम 5 हजार रुपए प्रीमियम व किराया फिक्स कर दिया था। इसी आधार पर मनमर्जी से 3-3 साल की लीज पर दुकानें अलॉट कर दी गईं।

विशेष सम्मेलन बुलाकर करें दुकानों का फैसला: नेता प्रतिपक्ष अजय परमार का कहना है कि यह गंभीर विषय है। चूंकि अब दुकानों के आवंटन, प्रीमियम व किराया निर्धारण के लिए शासन की नई गाइडलाइन आ चुकी है। जल्द से जल्द विशेष सम्मेलन बुलाकर निगम को दुकानों के संबंध में निर्णय लेने की जरूरत है। निगम के राजस्व का भी सवाल है।

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लीज रिन्युवल और किराया जमा करने पहुंचने लगे दुकानदार

भास्कर के खुलासे के बाद सालों से लीज रिन्युवल न कराने वाले व बकायादार किराया जमा करने निगम पहुंचने लगे हैं। दूसरी तरफ किराए पर दी गई दुकानों को भी खाली कराने की तैयारी है। निगम को सबसे पहले उन दुकानों की लीज निरस्त करनी चाहिए जो कि आनन फानन में या तो बंद कर दी गई या फिर खाली करा ली गई। महापौर अभय दरे का दावा है कि दुकानों के फर्जीवाड़े में निगम पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करेगा। बाजार विभाग से जानकारी निकलवाई जा रही है। पूर्व के जो भी अफसर इस फर्जीवाड़े में शामिल रहे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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