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कलेक्टोरेट के 12 अंगद: अफसर तो आते जाते रहे, ये न कभी हटे और न घटे

कलेक्टोरेट। ऐसी जगह जहां लोग न सिर्फ अपनी फरियाद लेकर आते हैं, बल्कि कई ऐसे काम भी यहीं से होते हैं जिन्हें पूरा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:45 AM IST

कलेक्टोरेट के 12 अंगद: अफसर तो आते जाते रहे, ये न कभी हटे और न घटे
कलेक्टोरेट। ऐसी जगह जहां लोग न सिर्फ अपनी फरियाद लेकर आते हैं, बल्कि कई ऐसे काम भी यहीं से होते हैं जिन्हें पूरा करवाने कई लोगों की जिंदगी ही कम पड़ जाती है तो कई लोग जिस दिन आते हैं, उसी दिन अपना काम पूरा करवाकर निकल लेते हैं। इस काम की तेजी और धीमी गति के मूल में कई बार उत्तरदायी कुछ खास कर्मचारी ही होते हैं।

कलेक्टर भले ही बदलते रहते हों, लेकिन ये कर्मचारी जिन्हें आम लाेग बाबूजी, साहब तक कहते हैं, वे सालों नहीं दशकों से यहीं जमे हैं। बिल्कुल अंगद की तरह। इन्हें कलेक्टोरेट के अंगद कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि कभी कभार दिखावे के लिए इनके तबादले होते जरूर हैं, लेकिन सिर्फ एक शाखा से दूसरी शाखा में, दूसरी शाखा में जाने पर उनका डिमोशन नहीं होता, बल्कि वे पहले से और भी ज्यादा पॉवरफुल हो जाते हैं। कलेक्टोरेट कार्यालय में करीब 60 कर्मचारी पदस्थ हैं। इनमें से करीब दर्जन भर कर्मचारी ऐसे हैं जो कई वर्षों से यहीं जमे हुए हैं।

शंकरलाल सोनी : दो दशक से डटे हैं, दो साल और मिल गए

कलेक्टोरेट में जमे कर्मचारियों में से एक शंकरलाल सोनी 31 मार्च को रिटायर्ड होने जा रहे थे, सीएम की घोषणा के बाद उन्हें दो साल और मिल गए । वे यहां करीब दो दशक से पदस्थ हैं। कलेक्टर के स्टेनो भी रहे। एक मामले में आरोप लगने के चलते उन्हें यहां से बदलकर दूसरी शाखा में भेज दिया गया, पर रहे कलेक्टोरेट में ही।

रमेश प्रसाद शुक्ला : छुट्टी पर जाएं तो लाइसेंस शाखा बंद

इन्हें कलेक्टोरेट में डेढ़ दशक से अधिक समय से जमे हुए हैं। रुतबा इतना है कि अवकाश पर जाते हैं तो शाखा के गेट पर ताला जड़ दिया जाता है। यह लिखा भी जाता है कि चूंकि शुक्ला बाबू कार्यालय में नहीं हैं, इसीलिए शाखा ही बंद कर दी गई है। अक्सर ऐसा देखकर तो लोग यही कहते हैं कि क्या शुक्ला जब रिटायर्ड हो जाएंगे तो क्या सागर में लाइसेंस शाखा बंद कर दी जाएगी?

चंदन सिंह बघेल : अब कलेक्टर के स्टेनो का पद संभाल रहे हैं

कलेक्टोरेट के सबसे महत्वपूर्ण कलेक्टर स्टेनो के पद पर अभी चंदन सिंह बघेल हैं। वे पिछले साल यहां तब आए जब सोनी हट गए। इसके पहले वे अपर कलेक्टर के यहां थे। कलेक्टोरेट में करीब एक दशक से अधिक समय से जमे हुए बघेल इन दिनों सबसे ज्यादा पॉवरफुल हैं।

यह भी डेढ़ से दो दशक से यहीं जमे हैं

इन कर्मचारियों के अलावा कई और भी ऐसे हैं, जो पिछले 8 से लेकर 20 सालों से कलेक्टोरेट में ही हैं। बीच में इस शाखा से उसमें गए भी तो वापस भी जल्दी ही आ गए। मसलन आरके अग्रवाल, मोहम्मद नसीर खान, एसपी लड़िया, आरपी सैनी, जीपी शुक्ला, सुधीर शर्मा, मोहम्मद शमीम खान, राजेश रावत, शोभना सोनी, बेनी प्रसाद प्रजापति आदि ऐसे कर्मचारी हैं, जो वर्षों से यहीं पर हैं।

यह बात सही है कि कई लोग जानकार होने के कारण लंबे समय तक जमे रहते हैं, पर नए कर्मचारी भी ऐसे आ रहे हैं जो टाइपिंग से लेकर हर काम में दक्ष हैं। कर्मचारियों के तबादले हर तीन साल में होते रहना चाहिए। यदि कोई लंबे समय से नहीं बदला गया है तो मैं अप्रैल माह में अपने यहां जो बदलाव करुंगा, उसमें ऐसे लोगों को शामिल करूंगा। - आलोक कुमार सिंह, कलेक्टर सागर

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