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एक क्लिक पर मिलेगी बुंदेलखंड के एेतिहासिक वैभव की जानकारी

Sagar News - जिले के ऐतिहासिक महत्व की इमारतें, किले, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, बावडियों आदि की जानकारी एक क्लिक पर लोगों...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:45 AM IST
एक क्लिक पर मिलेगी बुंदेलखंड के एेतिहासिक वैभव की जानकारी
जिले के ऐतिहासिक महत्व की इमारतें, किले, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, बावडियों आदि की जानकारी एक क्लिक पर लोगों को मिल सकेगी। यह पता लग सकेगा कि धामौनी या गढ़पहरा का किला कितना पुराना है, इसे किसने बनवाया, अभी किस स्थिति में है।

कौन सा मंदिर, मस्जिद या चर्च किस अवधि में बने? सबसे पुरानी मूर्ति कहां स्थापित है या कहां से खोजी गई थी। ऐसे स्मारक या ऐतिहासिक इमारतें जो 50 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं और जिन्हें जीर्णोद्धार एवं संरक्षण की आवश्यकता है, उनका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब तक जिले के 120 स्थानों की सूची बन चुकी है। जल्दी ही इसकी पूरी जानकारी वेबसाइट intach.org भी उपलब्ध होगी। ऐसा होने से इसका लाभ न सिर्फ पर्यटकों को मिलेगा, बल्कि शोधार्थियों को भी फायदा होगा।

वेबसाइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध होने पर वे आसानी से इनके बारे में जान समझ सकेंगे। इन स्थानों पर कब और कैसे पहुंचा जाए आदि की जानकारी भी इसमें दी जाएगी। यह काम भारतीय सांस्कृतिक निधि इंटेक संस्था द्वारा किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य अध्याय के संयोजक डाॅ. एचबी माहेश्वरी ‘जैसल’ ने बताया कि वर्तमान में इंटेक ग्वालियर अध्याय द्वारा सागर जिले के स्मारकों का सूचीकरण कार्य किया रहा है। फिलहाल सागर जिले के रहली, सागर शहर, खिमलासा, पाली, बीना, एेरन आदि जगहों की ऐतिहासिक महत्व की इमारतों की सूची बनाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि हमारे विशेषज्ञ डाॅ. नीलकमल माहेश्वरी, लव खंडेलवाल, विकास सिंह, हरिओम कुमार सिंघल आदि ने जगह-जगह जाकर हर एक स्थल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।

पर्यटन बढ़ेगा, लोगों को मिलेगा रोजगार

डॉ. महेश्वरी बताते हैं कि सागर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन लोग उनसे अनजान हैं। गढ़पहरा, धामौनी, सूर्य मंदिर रहली, ऐरण आदि ऐसी जगहें हैं, जिनके बारे में सभी लोग जानते हैं। इसके अलावा भी कई स्थान ऐसे हैं, जिनमें हजारों साल पुराने भित्ति चित्र हैं या फिर उस जगह का अपना महत्व है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में वह सिर्फ स्थानीय लोगों तक ही सिमटकर रह गए हैं। इन सभी की सूची वेबसाइट पर अपलोड करेंगे, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन को भी देंगे, ताकि इनका संरक्षण हो सके और इन जगहों का पर्याप्त प्रचार किया जा सके।

निर्माण वर्ष, प्रकार आदि से हो रही है ग्रेडिंग

डॉ. माहेश्वरी के मुताबिक जिन इमारतों और जगह का सूचीकरण किया जा रहा है, उनकी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। उदाहरण के लिए उनका नाम, अक्षांश, स्थान का पता, निर्माण वर्ष, संपत्ति का प्रकार, संपत्ति का मालिक, निर्माण का प्रकार, निर्माण की भौतिक पृष्ठभूमि आदि। इन सभी के आधार पर उनकी ग्रेडिंग भी की जा रही है, यानी कौन इमारत सबसे पुरानी है और कौन किस हाल में है।

भोपाल-ग्वालियर सहित 15 जिलों का काम हुआ पूरा

इंटेक द्वारा सागर के अलावा अन्य जिलों के ऐतिहासिक महत्व का डेटा तैयार किया जा चुका है। अब तक शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, दतिया, गुना, अशोकनगर, पन्ना, राजगढ़, छतरपुर, इंदौर, भोपाल, धार, खंडवा, बुरहानपुर, चित्रकूट जिलों का कार्य पूरा हो चुका है। अभी सागर के अलावा अन्य जिलों का काम भी चल रहा है।

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