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देश के हर काेने में ब्लड डोनेट करते हैं कर्नल गुप्ता

कर्नल गुप्ता का कहना है कि रक्तदान को लेकर एक बड़ी समस्या यह है कि जो लोग दान करना चाहते हैं। उन्हें पर्याप्त...

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:45 AM IST
कर्नल गुप्ता का कहना है कि रक्तदान को लेकर एक बड़ी समस्या यह है कि जो लोग दान करना चाहते हैं। उन्हें पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाते हैं। कई जगह ऐसी हैं, जहां ब्लड बैंक ही नहीं हैं। ऐसे लोगों को मैं सलाह देता हूं कि वह अपने आसपास के शहरों में जाकर यह काम करें। कर्नल के अनुसार मुझे जिस किसी भी सोशल एक्टिविटी में बुलाया जाता है, उसमें ब्लड डोनेशन के लिए एक दफा जरूर आग्रह करता हूं। मेरी प्रेरणा से नियमित रक्तदाता तो नहीं लेकिन जरूरतमंद के सामने आने पर कई लाेगाें ने रक्तदान किया है। कर्नल गुप्ता के अनुसार वह इस पुनीत कार्य से मेडिकली फिट होने तक जुड़े रहना चाहते हैं।

जियो नो िनगेटिव लाइफ

हर शहीद की पोर्ट्रेट पेटिंग बनाते हैं सागर के हरिकांत

पिछले 15 साल में 400 से भी ज्यादा परिवारों को दीं यादें

श्रीकांत त्रिपाठी|सागर

पुलिस मुख्यालय भोपाल में पदस्थ सागर के हरीकांत दुबे पिछले 15 सालों से शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों की पोर्ट्रेट पेटिंग बना रहे है। सालभर में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की पेंटिंग्स 21 अक्टूबर को आयोजित होने वाले पुलिस दिवस के दिन रखी जाती हैं। जिस पर पहले राज्यपाल माल्यापर्ण करते हैं और इसके बाद शहीद के परिवारों को इन्हें भेंट किया जाता है, ताकि शहीद की याद हमेशा परिवार के साथ रहे। हरीकांत अब तक करीब 400 शहीद पुलिसकर्मियों की पोर्ट्रेट पेंटिंग बना चुके हैं। उनके इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक उन्हें कई बार सम्मानित कर चुके हैं।

शौर्य स्मारक में इनकी 36 पेंटिंग - पोट्रेट पेटिंग के मामले में हरीकांत कई नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं। इतना ही नहीं इन्होंने अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक कई बड़ी हस्तियों की पेंटिंग्स बनाई हैं। हरीकांत अब तक करीब 10 हजार चेहरों को कैनवास पर उकेर चुके हैं।

हाल ही में भोपाल में बने शौर्य स्मारक में इनकी 36 पेंटिंग रखी गई हैं।

आरक्षक होते हुए डीजीपी

को भेजा था प्रस्ताव

सागर की श्रीराम नगर कॉलोनी निवासी हरीकांत बताते हैं कि उन्हें बचपन से पेटिंग का शौक था। 1987 में पुलिस की नौकरी मिलने के बाद उन्हें डर था कि कहीं उनका यह शौक छूट न जाए। उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ इस शौक को जारी रखा। ड्यूटी खत्म होते ही पेंटिंग्स में जुट जाते थे। 2001 में जब वे पुलिस दिवस में शामिल होने मुख्यालय पहुंचे तो यहां शहीद पुलिसकर्मियों की पासपोर्ट साइज फोटो बोर्ड पर लगाई जा रहीं थीं। उन्होंने घर पहुंचते ही डीजीपी के नाम पत्र लिखकर उनसे शहीदों की पोट्रेट पेटिंग बनाने का आग्रह किया। डीजीपी को उनकी यह बात अच्छी लगी और 2002 से अब तक पुलिस दिवस के दिन शहीद के परिवार को पोट्रेट पेंटिंग देने का रिवाज चल पड़ा।

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