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सॉफ्टवेयर में बदलाव से छोटे उद्योगों को मिलेगी राहत: नक्शे की मंजूरी, बैंक लोन होगा आसान

छोटे उद्योगों के लिए बड़ी अड़चन बना सॉफ्टवेयर जल्दी ही बदला जाएगा। इससे नक्शा मंजूर होने में मदद मिलेगी। इसका...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:25 AM IST
छोटे उद्योगों के लिए बड़ी अड़चन बना सॉफ्टवेयर जल्दी ही बदला जाएगा। इससे नक्शा मंजूर होने में मदद मिलेगी। इसका फायदा प्रदेश की लगभग एक हजार यूनिट को मिलेगा, क्योंकि बैंक से लोन मिलना आसान हो जाएगा।

प्रदेश में छोटे उद्योगों को विकसित करने के लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) ने शेड बनाकर दिए थे। पचास साल पुराने इन शेड में अब सुधार करना आवश्यक हो गया है। सुधार कार्य नक्शा मंजूरी के बाद ही संभव हो पाएगा। इसके लिए सॉफ्टवेयर निर्धारित किया गया है। इसकी प्रोग्रामिंग इस तरह की गई है कि यह साइट पर पूरी तरह कन्सट्रक्शन की अनुमति नहीं देता है। नियमानुसार कुछ हिस्सा चारों तरफ रिक्त छोड़ना पड़ता है। लघु उद्योग इसी का विरोध लंबे समय से कर रहे हैं।

हाल ही में भोपाल में लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। लघु और सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लोगों ने उद्योग प्रमुख सचिव को बताया कि डीआईसी ने उन्हें सौ फीसदी हिस्से पर कंस्ट्रक्शन करके दिया था। अगर तीस फीसदी हिस्से को खुला छोड़ दिया जाएगा तो कारखाना चलाने मेें मुश्किल होगी। इसलिए पूरे हिस्से पर निर्माण की अनुमति दी जाए। इसके लिए निर्धारित सॉफ्टवेयर में बदलाव करना आवश्यक है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव संजय पटवर्धन ने बताया कि प्रमुख सचिव ने आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।

डीआईसी मंजूरी देगा नक्शे को

उद्योग सचिव ने शेड निर्माण और सुधार कार्य के लिए कमेटी बनाने के भी निर्देश दिए हैं। इसमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और उद्योग विभाग से अफसर होंगे। कमेटी के पास ही नक्शा अप्रूवल संबंधी आवेदन पहुंचेंगे। रिव्यू के बाद डीआईसी अपने स्तर पर अनुमति दे सकेगी।

भास्कर संवाददाता | सागर

छोटे उद्योगों के लिए बड़ी अड़चन बना सॉफ्टवेयर जल्दी ही बदला जाएगा। इससे नक्शा मंजूर होने में मदद मिलेगी। इसका फायदा प्रदेश की लगभग एक हजार यूनिट को मिलेगा, क्योंकि बैंक से लोन मिलना आसान हो जाएगा।

प्रदेश में छोटे उद्योगों को विकसित करने के लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) ने शेड बनाकर दिए थे। पचास साल पुराने इन शेड में अब सुधार करना आवश्यक हो गया है। सुधार कार्य नक्शा मंजूरी के बाद ही संभव हो पाएगा। इसके लिए सॉफ्टवेयर निर्धारित किया गया है। इसकी प्रोग्रामिंग इस तरह की गई है कि यह साइट पर पूरी तरह कन्सट्रक्शन की अनुमति नहीं देता है। नियमानुसार कुछ हिस्सा चारों तरफ रिक्त छोड़ना पड़ता है। लघु उद्योग इसी का विरोध लंबे समय से कर रहे हैं।

हाल ही में भोपाल में लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। लघु और सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लोगों ने उद्योग प्रमुख सचिव को बताया कि डीआईसी ने उन्हें सौ फीसदी हिस्से पर कंस्ट्रक्शन करके दिया था। अगर तीस फीसदी हिस्से को खुला छोड़ दिया जाएगा तो कारखाना चलाने मेें मुश्किल होगी। इसलिए पूरे हिस्से पर निर्माण की अनुमति दी जाए। इसके लिए निर्धारित सॉफ्टवेयर में बदलाव करना आवश्यक है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव संजय पटवर्धन ने बताया कि प्रमुख सचिव ने आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।


भास्कर संवाददाता | सागर

छोटे उद्योगों के लिए बड़ी अड़चन बना सॉफ्टवेयर जल्दी ही बदला जाएगा। इससे नक्शा मंजूर होने में मदद मिलेगी। इसका फायदा प्रदेश की लगभग एक हजार यूनिट को मिलेगा, क्योंकि बैंक से लोन मिलना आसान हो जाएगा।

प्रदेश में छोटे उद्योगों को विकसित करने के लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) ने शेड बनाकर दिए थे। पचास साल पुराने इन शेड में अब सुधार करना आवश्यक हो गया है। सुधार कार्य नक्शा मंजूरी के बाद ही संभव हो पाएगा। इसके लिए सॉफ्टवेयर निर्धारित किया गया है। इसकी प्रोग्रामिंग इस तरह की गई है कि यह साइट पर पूरी तरह कन्सट्रक्शन की अनुमति नहीं देता है। नियमानुसार कुछ हिस्सा चारों तरफ रिक्त छोड़ना पड़ता है। लघु उद्योग इसी का विरोध लंबे समय से कर रहे हैं।

हाल ही में भोपाल में लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। लघु और सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लोगों ने उद्योग प्रमुख सचिव को बताया कि डीआईसी ने उन्हें सौ फीसदी हिस्से पर कंस्ट्रक्शन करके दिया था। अगर तीस फीसदी हिस्से को खुला छोड़ दिया जाएगा तो कारखाना चलाने मेें मुश्किल होगी। इसलिए पूरे हिस्से पर निर्माण की अनुमति दी जाए। इसके लिए निर्धारित सॉफ्टवेयर में बदलाव करना आवश्यक है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव संजय पटवर्धन ने बताया कि प्रमुख सचिव ने आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।

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