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भागवत कथा से सीखने और उसमें बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है : जुगल किशोर

अभिनंदन नगर में चल रही श्रीमद भागवत कथा भास्कर संवाददाता | सागर भगवान के मुख से निकली भागवत ज्ञान रूपी गंगा...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 06:30 AM IST
अभिनंदन नगर में चल रही श्रीमद भागवत कथा

भास्कर संवाददाता | सागर

भगवान के मुख से निकली भागवत ज्ञान रूपी गंगा में जो गिर जाता है वह इस भव सागर से तर जाता है।

यह बात अभिनंदन नगर रजाखेड़ी में श्रीमद भागवत कथा के शुभारंभ पर कथा व्यास आचार्य जुगल किशोर महाराज वृंदावन ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों से निकली गंगा के पास तो लोगो को स्वयं चलकर जाना पड़ता है, लेकिन भगवान के मुख से निकली भगवत कथा का कहीं भी श्रवण किया जा सकता है। इसके श्रवण करने से व्यक्ति इस सांसारिक रूपी जीवन के बंधनों से मुक्त हो जाता है और वह जितना ज्यादा इसकी ओर आकर्षित होता जाता है उसे उतना ही पुण्य फल प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि भगवान के तीन रूप हैं जिसमें भगवान सत्य है, चैतन्य है और सदानंद है। इसीलिए हमें भागवत कथा से सीखने की आवश्यकता है और उसमें बताए हुये मार्ग पर चलना जरूरी है। भागवत कथा को शरीर से नहीं पूरे मन से सुनना चाहिए तभी इसका फल प्राप्त होता है। पहले दिन अभिनंदन नगर से कलश यात्रा निकाली गई जो अवधूत आश्रम रजाखेड़ी से होते हुए वापस कथा स्थल पहुंची।