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"पद्मावत जैसे विषयों पर सरकार नहीं समाज को आगे आना चाहिए'

जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी के सभागार में राष्ट्रवाद बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय राष्ट्रीय स्वयं सेवक...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:30 AM IST
जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी के सभागार में राष्ट्रवाद बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा संगोष्ठी हुई।

बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी भोपाल ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ है, असहमत होने की स्वतंत्रता। तर्क-वितर्क, मत-मतांतर, वाद-विवाद से नई बातें सामने आती हैं। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात करने की पूरी आजादी होनी चाहिए तभी उसकी सार्थकता है। अभिव्यक्ति की आजादी से सबसे बड़ा खतरा सरकारों को है, इसलिए वह इस पर तमाम कारण बताकर उस पर बंदिश लगाना चाहती हैं। मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय मंत्री मुकुल कानिटकर थे। पद्मावत को लेकर उपजे विवाद पर उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतीकों और आस्थाओं से खिलवाड़ बंद होना चाहिए। इस तरह के विषयों पर सरकार को नहीं वरन समाज को आगे आना होगा। समाज के पास ‘राइटर टू रिजेक्ट‘ का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अति उदारवाद के चलते हमारे राष्ट्र को काफी नुकसान उठाना पड़ा, इतिहास इसका साक्षी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘‘मैं‘‘ से ‘‘हम‘‘ हो जाने की प्रक्रिया ही राष्ट्रीयता है। उन्होंने महाभारत में युधिष्ठिर-द्रोणाचार्य के संवाद का संदर्भ देते हुए कहा कि युद्ध के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर को तक मिथ्या संवाद करना पड़ा। यह कृष्ण नीति थी, इसी पर चलकर हम राष्ट्रोत्थान कर सकते हैं। राष्ट्रहित में अगर हमें झूठ भी बोलना पड़े तो उसमें कोई बुराई नहीं। भारतीय संस्कृति में उदारवादी व्यवस्था रही है, सभी को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता आदिकाल से रही। मंच पर विभाग संघ चालक डाॅ. गौरीशंकर चौबे, नगर संघ चालक दीनानाथ मिश्र भी मौजूद थे।

संचालन शैलेंद्र ठाकुर आभार रितुल सराफ ने माना। इस मौके पर सागर विवि के कुलाधिपति प्रो. बलवंत राय जॉनी, कुलपति प्रो. आरपी तिवारी, अनिल डागा, प्रांत सह कार्यवाह सुनील देव, विभाग प्रचारक राजेंद्र , नगर प्रचारक महेंद्र, डाॅ. शरद सिंह, डाॅ. सरोज गुप्ता, प्रो. केएस पित्रे, प्रो. सुरेश आचार्य, डाॅ. धीरेंद्र मिश्रा, डाॅ. अमर जैन, डाॅ. अशोक पन्या मौजूद थे।

आयोजन

जेएनपीए में राष्ट्रवाद बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय पर संगोष्ठी हुई, मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा-

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