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हास्य नाटक के जरिए बताया माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा दिव्य मंत्र

सागर. नाटक अलख निरंजन के मंचन के दौरान कलाकार। रवींद्र भवन में हास्य नाटक अलख-निरंजन का मंचन किया गया भास्कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:30 AM IST

सागर. नाटक अलख निरंजन के मंचन के दौरान कलाकार।

रवींद्र भवन में हास्य नाटक अलख-निरंजन का मंचन किया गया

भास्कर संवाददाता | सागर

भक्त श्रवण कुमार फाउंडेशन द्वारा रवींद्र भवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्था शक्तिपुंज समिति नाट्य एवं फिल्म ग्रुप द्वारा शिक्षाप्रद एवं हास्य नाटक ‘‘ अलख निरंजन ’’ का मंचन किया गया।

नाटक में संन्यासी व उनका चेला चंदनदास एक गांव में पहुंचते हैं। यहां उनकी मुलाकात गांव के ही चार सगे भाइयों से होती है, जो संन्यासी से दिव्य मंत्र प्राप्त करने के लिए उनसे याचना करते हैं।

संन्यासी चारों भाइयों को कुछ शर्तों के साथ दिव्य मंत्र देने को तैयार हो जाते हैं। नाटक के अंत में संन्यासी बताते हैं कि तीनों लोक में माता-पिता की सच्ची सेवा करने से बड़ा दिव्य मंत्र और कोई नहीं है। अतः सबको अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए।

नाटक का लेखन ओपी रिछारिया तथा निर्देशन संजीत भंडारी ने किया। नाटक में सतीश नामदेव, स्वप्निल गुप्ता, अमित साहू, भरत भंडारी, प्रशंसा रिछारिया, पूर्वी जैन, आदित्य जैन, सृष्टि साहू, मुस्कान तिवारी, कीर्ति(रिंकी) मेहरा, आयुष (हनी) मेहरा, सुप्रिया जैन ने भूमिका निभाई। संगीत पं. गोविंद गुरू ने दिया। कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने नृत्य आदि विभिन्न प्रस्तुतियां दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक शैलेन्द्र जैन ने की। कार्यक्रम के अंत में शक्ति पुंज समिति नाट्य एवं फिल्म ग्रुप के सभी कलाकारों को भक्त श्रवण कुमार फाउंडेशन के अध्यक्ष दीपक भंडारी व अतिथियों ने सर्टिफिकेट एवं मोमेंटो दिए। कार्यक्रम की शुरूआत में फाउंडेशन के अध्यक्ष व अतिथियों ने सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्ववलन कर शुरूआत की।

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