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फरवरी में ही 2.69 मीटर घट गया राजघाट का जलस्तर, बर्बादी नहीं रोक पाया निगम

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:30 AM IST

Sagar News - जनवरी के अंत तक ही बांध का जलस्तर ढ़ाई मीटर से अधिक घट गया है। नगर निगम द्वारा की जाने वाली सप्लाई से हर दिन राजघाट...

फरवरी में ही 2.69 मीटर घट गया राजघाट का जलस्तर, बर्बादी नहीं रोक पाया निगम
जनवरी के अंत तक ही बांध का जलस्तर ढ़ाई मीटर से अधिक घट गया है। नगर निगम द्वारा की जाने वाली सप्लाई से हर दिन राजघाट का जल स्तर 3 सेंटीमीटर उतर रहा है। राजघाट का पानी पिछले 14 दिन से आर्मी को नदी के रास्ते से दिया जा रहा है। पानी की इस सप्लाई के चलते अब राजघाट से लगभग 4 सेंटीमीटर पानी राेज कम हो रहा है।

एक फरवरी को राजघाट बांध का फुल टैंक लेवल 515 मीटर से घटकर 512.31 मीटर पर आ गया है। तेज गति से कम हो रहे जल स्तर के कारण राजघाट बांध के पांच चेंबर पानी के बाहर आ गए हैं। जल स्तर गिरने का सिलसिला ऐसे ही बना रहा तो अगले महीने यानी मार्च लगते ही बड़े चेंबरों के बाजू में लाइन से लगे 6 छोटे चेंबर भी दिखाई देने लगेंगे। नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो तेज धूप के चलते राजघाट से काफी पानी वाष्प बन कर उड़ेगा तब बांध का पानी और तेजी से कम होगा।

सप्लाई

शहर की आबादी का 60% हिस्सा पानी के लिए राजघाट पर निर्भर है।

प्रतिबंध लगाएंगे


दिखने लगे चैंबर | गर्मी आने से पहले ही बनने लगी जलसंकट जैसी स्थिति

13 साल से मेन पाइप के ज्वाइंट में 13 लीकेज, हर दिन बर्बाद हो रहा है हजारों लीटर पानी

सागर | राजघाट बांध से शहर तक आने से पहले ही हर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। पीने के पानी की बर्बादी का सिलसिला पिछले 13 साल यानी बांध से पानी की सप्लाई शुरू होने वाले दिन से लेकर अब तक जारी है। शहर से राजघाट बांध की दूरी 14 किमी है। पाइप लाइन की लंबाई भी 14 किमी है। इस मेन पाइप लाइन में ही 13 जगह से पानी भारी मात्रा में लीक हो रहा है।

नगर निगम के अफसर पाइप से 24 घंटे पानी बहने का नजारा पिछले 13 साल से देख रहे हैं, वे इसे सिस्टम की गड़बड़ी कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। अफसरों का कुतर्क यह भी है कि प्रेशर से पानी छोड़ा जाएगा तो कुछ पानी लीक होगा ही।

इधर, मिस मैनेजमेंट की मिसाल

समस्या यह भी है

राजघाट का पानी, वाटर लाइन से कई वार्डों के अंतिम छोर तक कम प्रेशर से पहुंचाया जा रहा है। इस वजह से दूर के क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पानी वितरण सिस्टम को ठीक करने के लिए आयुक्त और महापौर इंजीनियर को निर्देश दे देते हैं। इसमें कहा जाता है कि सबसे पहले दूर के क्षेत्रों में फुल प्रेशर से पानी पहुंचाया जाए, जिससे वहां घरों तक पानी पहुंचे। इसके बाद वाटर लाइन के नजदीक के क्षेत्रों में सप्लाई को खोला जाए। इससे पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इन निर्देशों से कम प्रेशर की समस्या अब तक तो कभी दूर नहीं हुई।

5 साल से केमिस्ट नहीं, पानी भी नहीं हो रहा साफ

सागर । शहर को सप्लाई होने वाले राजघाट बांध के पानी का प्रॉपर शुद्धिकरण करने के लिए पिछले 5 साल से निगम के पास केमिस्ट नहीं है। पूर्व केमिस्ट सराफ के रिटायरमेंट के बाद से उनका एक असिस्टेंट गुरुदत्त पांडेय अनुभव के आधार पर क्लोरीनेशन से लेकर पानी शुद्धिकरण का पूरा काम देख रहा है। वह इसके लिए क्वालीफाइड नहीं है। इससे किसी भी दिन कोई अनहोनी हो सकती है। इस बीच एलम की जगह फिर से पीएसी घोल सप्लाई के लिए लोग सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में इंदौर की एक कंपनी के अधिकारी यहां जनप्रतिनिधियों से मिल चुके हैं।

पीएसी घोल का हुआ था पुरजोर विरोध : पिछले साल तक पीएसी घोल से पानी ट्रीटमेंट हो रहा था। मटमैले पानी की शिकायतें आने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय परमार ने इसका विरोध जताते हुए सप्लाई बंद करा दी थी। अब फिर पीएसी को लेकर गतिविधियां बढ़ गई हैं।

प्लांट पर एलम मिलाने में भी लापरवाही : ट्रीटमेंट के दौरान भी लापरवाही बरती जा रही है। एलम की सिल्लियां मैनुअली पानी में डालना होती है। इसकी रात में कोई मॉनीटरिंग ही नहीं हो रही कि कर्मचारी एलम मिला भी रहे हैं या नहीं। निगम कमिश्नर अनुराग वर्मा का कहना है कि केमिस्ट का प्रस्ताव शासन के पास लंबित है।

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