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अध्यात्म का पूर्णत्व है पर्यावरण संरक्षण : डॉ. तिवारी

सागर | स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के छठवां अन्तरर्राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन “प्रदूषण और कृषि फार्मेसी,...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:30 AM IST
सागर | स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के छठवां अन्तरर्राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन “प्रदूषण और कृषि फार्मेसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से इसका नियंत्रण” विषय पर डॉ. गौरव मुदगल ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या ने मांग और आपूर्ति के संतुलन को बिगाड़ दिया है। इसलिए जनसंख्या को बढ़ने से रोकने के लिए जन-जानरूकता लाना अनिवार्य है।

डॉ. विपिन धोटे ने बताया प्रकृति का शोषण मानव ही नहीं जीवधारियों का जीवन कठिन कर दिया है। जैव प्रकृति संकटापन्न स्थिति में हैं जो पर्यावरण को दूषित कर रहे हंै। नारी उद्यामिता के अभिप्रेरणात्मक तत्व पर सुश्री ग्लैडिसी अपांग ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. सेमुअल नायर ने कहा मानव, पर्यावरण का एक अंग है। यह हमेशा ही अपनी गतितविधयों द्वारा पर्यावरण में कुछ-न-कुछ परिवर्तन लाता रहा है। जिससे पर्यावरण असंतुलन जैसी स्थिति निर्मित हो गई है।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरपी तिवारी ने मशीनी विश्व के दृष्टिकोण ने जीवन को वस्तुवादी बनाया। समानता के अभाव में जीवन की भौतिकता एक ऐसी दौड़ बन गया है जिसमें हर संसाधन का शोषण कर बलशाली द्वारा जीतने की स्पर्धा आरंभ हो गई है। कार्यशाला में 17 सत्र, 17 मौखिक प्रस्तुति की गई। 182 पोस्टर लगाये गये जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर, छात्र-छात्राओं को प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार बांटे गये। 472 छात्र-छात्राओं ने पंजीयन कराया। संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने सभी अतिथियों की प्रशंसा करते हुए पुन: आगमन के लिए आमंत्रित किया संचालन नेहा दुबे ने किया। कार्यशाला में डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. वीव्ही प्राचार्य, डॉ. नीरज तोपखाने, डॉ. उपस्थित रहे।