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होलिका दहन आज, शुभ मूहूर्त शाम 6.29 से रात 9 बजे तक

इस बार होलिका दहन में अशुभ माना गया भद्रा योग बाधक नहीं रहेगा। अगले दिन होली पर्व पर भी 28 साल बाद गुरु-शनि के दुर्लभ...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:30 AM IST
इस बार होलिका दहन में अशुभ माना गया भद्रा योग बाधक नहीं रहेगा। अगले दिन होली पर्व पर भी 28 साल बाद गुरु-शनि के दुर्लभ योग के बीच मनेगा। मघा व फाल्गुनी नक्षत्र की स्थिति भी शुभ रहेगी। सभी योग स्टूडेंट्स, बेरोजगारों, व्यापारियों, किसानों समेत समाज के अन्य वर्गों को लाभ पहुंचाने वाला रहेगा। इससे पहले ऐसा संयोग होली पर्व पर वर्ष 1990 में बना था।

पंडित रामगोविंद शास्त्री ने बताया कि वर्तमान में गुरु स्वामित्व वाली धनु राशि में शनिदेव विराजमान हैं। होली पर्व के दिन गुरु और शनि का यह दुर्लभ संयोग लाभकारी रहेगा। गुरु के घर में शनि होने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। शनि प्रजा और न्याय का कारक ग्रह होता है। इससे प्रजा के हित में कई बड़े निर्णय होंगे। दूसरी ओर होली के दिन मघा और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। मघा नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। यह कई रहस्यों को उजागर करने वाला ग्रह है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी लक्ष्मी कारक शुक्र ग्रह होगा। इससे लोगों की आमदनी बढ़ेगी। कर्मचारियों की मांगें पूरी हो सकती हैं। व्यापारियों को धन लाभ होगा। पश्चिमी देशों से देश को लाभ के कई अवसर मिलेंगे।

मुहूर्त

पं. शास्त्री ने बताया कि एक मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा पर भद्रा योग सूर्योदय से शाम 6.29 बजे तक रहेगा। 7.30 अमृत चौघडिय़ा और 9 बजे तक चर है। भद्रा समाप्ति के बाद से ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएगा, जो रात 9 बजे तक रहेगा। इस दौरान सपरिवार होलिका दहन किया जाना शुभ है। इसके बाद भी दहन किए जा सकेंगे।

सागर. होलिका दहन के एक दिन पहले ही भीतर बाजार में तैयारी पूरी कर ली गई है।

इसलिए भद्रा-काल में होलिका दहन करना है वर्जित

पंडित शास्त्री ने बताया कि भद्रा काल के दौरान होलिका दहन से गांव को अग्नि से हानि होती है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा योग को अशुभ मानते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मकर राशि में चंद्रमा का अष्टम, वृषभ में चौथा और कन्या में 12वां योग बन रहा है। इन राशियों के जातकों को सावधानियां रखनी होगी, जिसमें रात्रि भ्रमण न करे, नशे से दूर रहे। ऐसे कोई भी काम न करे, जो दुर्घटना के कारक है। बाकी राशियों के लिए योग शुभ है।

होली पर सजी बुंदेलखंड के वाद्य यंत्र नगड़िया की दुकान

आज भले ही संगीत की दुनिया में कई आधुनिक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता हो, लेकिन बुंदेलखंड के नगड़िया वाद्ययंत्र का अपना एक अलग ही स्थान है। बुंदेलखंड में शुभ अवसरों पर जब इसकी तान छेड़ी जाती है, तब कई किमी दूर तक उसकी आवाज पहुंचती है। बुंदेलखंड में प्रत्येक बुंदेलखंडी आयोजन में इसका उपयोग किया जाता है। बुंदेलखंड का संगीत नगड़िया की तान के बिना अधूरा है। आज नगड़िया बाजार में केवल बुधवार के दिन बिकती हुई देखी गई। बुंदेलखंड के प्रत्येक लोक आयोजन में नगड़िया का उपयोग किया जाता है। महज तीन सौ से लेकर पांच सौ रुपए तक इस की कीमत होती है और इसे बनाने में भी विशेष नक्काशी की जाती है। बुंदेलखंडी नृत्य राई और होली के समय गाई जाने वाली फाग नगड़िया के बिना अधूरी है। इसे दो लकड़ी की डंडियों के सहारे बजाया जाता है। जिस समय नगड़िया की तान निकलती है तब नाचने वाला व्यक्ति पांच मिनट के अंदर सौ मीटर तक का चक्कर लगा लेता है। एक हजार रुपए से कम कीमत का यह वाद्य यंत्र है, जो बुंदेलखंड की शान कहा जाता है। नगड़िया की नक्काशी अपने आप में दुर्लभ है। देवी भक्तें भी नगड़िया की तान पर ही गाई जाती हैं।