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यूजीसी की नई गाइडलाइन-प्रोफेसरों को कॉलेज में 7 घंटे रुकना अनिवार्य

अब नए सत्र से प्रोफेसर व लेक्चरर को कॉलेज में पूरे सात घंटे रुकना होगा। यूजीसी कॉलेजों के नियम-कायदों में बड़ा...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:30 AM IST
अब नए सत्र से प्रोफेसर व लेक्चरर को कॉलेज में पूरे सात घंटे रुकना होगा। यूजीसी कॉलेजों के नियम-कायदों में बड़ा बदलाव करेगा। प्रस्तावित नियमों पर सुझाव और आपत्ति आमंत्रित की है। इस नियम के लागू होने के बाद स्टूडेंट की समस्याएं काफी हद तक कम हो सकेंगी। समाधान के लिए पीरियड के बाद भी प्रोफेसर उपलब्ध रहेंगे।

28 फरवरी तक देना है फीडबैक : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 9 फरवरी को यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षक और अन्य शैक्षणिक स्टॉफ की नियुक्ति के लिए रेगुलेशन-2018 का ड्राफ्ट जारी किया है। 28 फरवरी तक पब्लिक और टीचर्स एसोसिएशन के साथ ही विश्वविद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षकों को फीडबैक देनी होगी। इस रेगुलेशन का सबसे ज्यादा असर टीचिंग स्टॉफ पर पड़ेगा। वर्तमान व्यवस्था में लाख-डेढ़ लाख वेतन पाने वाले प्रोफेसर और लेक्चरर अमूमन एक या दो पीरियड ही लेते हैं। यानी वह कॉलेज एक से 3 घंटे ही रुकते हैं। इस कारण कई बार क्लासेस नहीं लगती है। स्टूडेंट को अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए प्रोफेसर उपलब्ध नहीं रहते हैं।

अतिथि विद्वानों को नियमित जितना वेतन

यूजीसी ने अतिथि विद्वानों को भी बड़ी राहत दी है। लंबे समय से नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन की मांग कर रहे यूजीसी ने कांट्रेक्ट टीचर्स को नए नियमों के तहत रैगुलर अध्यापकों के बराबर वेतन देने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक अनुबंध पर रखने की बजाय सीधी भर्ती की जाए। शिक्षकों में डिजिटल लर्निंग को भी प्रमोशन का आधार बनाया जाएगा। अब ऑनलाइन कोर्सेस को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि प्रोफेसरों की कमी के कारण जो दिक्कतें आ रही हैं वह दूर हो सकें।

भास्कर संवाददाता | सागर

अब नए सत्र से प्रोफेसर व लेक्चरर को कॉलेज में पूरे सात घंटे रुकना होगा। यूजीसी कॉलेजों के नियम-कायदों में बड़ा बदलाव करेगा। प्रस्तावित नियमों पर सुझाव और आपत्ति आमंत्रित की है। इस नियम के लागू होने के बाद स्टूडेंट की समस्याएं काफी हद तक कम हो सकेंगी। समाधान के लिए पीरियड के बाद भी प्रोफेसर उपलब्ध रहेंगे।

28 फरवरी तक देना है फीडबैक : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 9 फरवरी को यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षक और अन्य शैक्षणिक स्टॉफ की नियुक्ति के लिए रेगुलेशन-2018 का ड्राफ्ट जारी किया है। 28 फरवरी तक पब्लिक और टीचर्स एसोसिएशन के साथ ही विश्वविद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षकों को फीडबैक देनी होगी। इस रेगुलेशन का सबसे ज्यादा असर टीचिंग स्टॉफ पर पड़ेगा। वर्तमान व्यवस्था में लाख-डेढ़ लाख वेतन पाने वाले प्रोफेसर और लेक्चरर अमूमन एक या दो पीरियड ही लेते हैं। यानी वह कॉलेज एक से 3 घंटे ही रुकते हैं। इस कारण कई बार क्लासेस नहीं लगती है। स्टूडेंट को अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए प्रोफेसर उपलब्ध नहीं रहते हैं।