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अनुकंपा नियुक्ति की जगह बनाया दैवेभो, पद स्पष्ट नहीं, 10 साल बाद भी नहीं मिला न्याय

अनुकंपा में सीधी नियुक्ति का प्रावधान, फिर दैवेभो क्यों? 11 साल से यह सभी कर्मचारी अपने हक के लिए लड़ रहे हैं,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 07:30 AM IST

अनुकंपा में सीधी नियुक्ति का प्रावधान, फिर दैवेभो क्यों?

11 साल से यह सभी कर्मचारी अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। इसी बीच एक दैवेभो कर्मचारी दीपक चौधरी ने अजाक्स के कार्यवाहक अध्यक्ष आरसी तेकाम को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। अजाक्स के संभागीय उपाध्यक्ष सतीश चौधरी बताते हैं कि अनुकंपा नियुक्ति में रिक्त पदों के विरुद्ध सीधे नियुक्ति देने का प्रावधान है। ऐसे में 10 कर्मचारियों को दैवेभो कैसे बना दिया गया? यह जांच का विषय है। हमने कलेक्टर और पीएस से मांग की है कि सभी को नियमित किया जाए और पिछले आदेश की भी जांच हो।

सभी को एक ही पदनाम :

रसोइया, जलवाहक आैर चौकीदार

वर्ष 2007-08 का जो आदेश है, उसमें सभी को एक ही पदनाम दिया गया है। रसोइया, जलवाहक और चौकीदार। जबकि जिन कर्मचारियों के आश्रितों ने नौकरी के लिए आवेदन किया था, वे कर्मचारी जब कार्यरत थे, उन सभी के अलग-अलग पदनाम थे। जाहिर सी बात है कि उनके निधन के बाद वही पद खाली भी हुए। लिहाजा जो नियुक्तियां दैवेभो के पद पर की भी गईं, उनमें सभी का पदनाम अलग-अलग ही दर्शाना था। न कि एकजाई।

मंडला-खरगोन में नियमित किया तो यहां क्यों नहीं?

रसोइया, जलवाहक, चौकीदार के पद पर दैवेभो के पद पर कार्यरत और अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र दीपक चौधरी बताते हैं कि उनके पिता रामचरण की मृत्यु 2003 में हुई। वे कन्या छात्रावास खुरई में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। मुझे कलेक्टर दर पर नौकरी पर रख लिया गया। शासन ने अन्य सभी विभागों में दैवेभो को नियमित कर दिया, लेकिन हम लोगों को नहीं किया है। जबकि हमारे ही विभाग में मंडला, खरगौन जिलों में नियमितीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है।

इन कर्मचारियों की दैवेभो की नियुक्ति कैसे हुई, यह मैं नहीं बता सकता, क्योंकि उस समय कोई अधिकारी रहे होंगे, मैं नहीं था। यह पूरा मामला दिखवा रहा हूं। विनियमितिकरण की कार्रवाई चल रही है। सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है, सिर्फ एक-दो अधिकारियों के हस्ताक्षर और होना है। वह होते ही इन्हें नियमित कर दिया जाएगा। - एचएस राजपूत, असिस्टेंट कमिश्नर आदिम जाति कल्याण विभाग

मंडला-खरगोन में नियमित किया तो यहां क्यों नहीं?

रसोइया, जलवाहक, चौकीदार के पद पर दैवेभो के पद पर कार्यरत और अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र दीपक चौधरी बताते हैं कि उनके पिता रामचरण की मृत्यु 2003 में हुई। वे कन्या छात्रावास खुरई में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। मुझे कलेक्टर दर पर नौकरी पर रख लिया गया। शासन ने अन्य सभी विभागों में दैवेभो को नियमित कर दिया, लेकिन हम लोगों को नहीं किया है। जबकि हमारे ही विभाग में मंडला, खरगौन जिलों में नियमितीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है।

इन कर्मचारियों की दैवेभो की नियुक्ति कैसे हुई, यह मैं नहीं बता सकता, क्योंकि उस समय कोई अधिकारी रहे होंगे, मैं नहीं था। यह पूरा मामला दिखवा रहा हूं। विनियमितिकरण की कार्रवाई चल रही है। सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है, सिर्फ एक-दो अधिकारियों के हस्ताक्षर और होना है। वह होते ही इन्हें नियमित कर दिया जाएगा। - एचएस राजपूत, असिस्टेंट कमिश्नर आदिम जाति कल्याण विभाग

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Web Title: अनुकंपा नियुक्ति की जगह बनाया दैवेभो, पद स्पष्ट नहीं, 10 साल बाद भी नहीं मिला न्याय
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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