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नौरादेही अभयारण्य में आए विदेशी परिंदे, तालाबों में की अठखेलियां

Sagar News - हर साल नौरादेही अभयारण्य में आते हैं साईवेरियन परिंदे विकास चैौरसिया |रहली नौरादेही अभयारण्य में विदेशी...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:35 AM IST
Sagar News - alpine trees in the nauridehi sanctuary the eights of ponds
हर साल नौरादेही अभयारण्य में आते हैं साईवेरियन परिंदे

विकास चैौरसिया |रहली

नौरादेही अभयारण्य में विदेशी साईबेरियन परिंदों को आना शुरू हो गया है। ये परिंदे देश के उत्तरी भागों से सर्दी के मौसम में कुछ दिनों के लिए अभयारण्य में आते है। उत्तरी हिस्सों में हो रही भारी वर्फवारी से वहां रहने वाले स्टार्क, साईबेरिन क्रेन आदि साईबेरियन पक्षियों को विचरण के अलावा भोजन का संकट पैदा हो जाता है जिससे वे वहां से पलायन करते है। अभयारण्य में स्थित छेवला, जमरासी, खपराखेडा, कैंप तालाबों में इन दिनों साईबेरियन पक्षियों ने डेरा डाल लिया है । हजारों किमी की लंबी दूरी का सफर तय करने के बाद यहां पहुंचने से वे थोड़े थके नजर आए।

तालाबों में साईबेरियन पक्षियों का पसंदीदा भोजन मछली मेढ़कों के अलावा वनोपज अनाज वगैरह आसानी से यहां मिल जाते हैं। हालांकि इस साल कम बारिश होने से अभयारण्य के कैंप, छेवला, खपराखेडा, जमरासी, तालाबों में पानी की कमी है जिससे ये पक्षी आसमान में ही उड़कर और पेड़ों की डालियों पर ही ज्यादातर वक्त बिता रहे है।

सैलानियों को तालाबों में विदेशी मेहमान परिंदों की अठखेलियों के नजारे देखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। गुलाबी सर्दी के मौसम में इन दिनों बड़ी संख्या में सैलानी नौरादेही अभयारण्य में पहुंच रहे हैं। सर्दियों के मौसम में जबलपुर, दमोह, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर के अलावा बुंदेलखंड और प्रदेश भर से सैलानी नौरादेही अभयारण्य आते है। वे यहां साईबेरियन बर्ड के अलावा नीलगाय, चिंकारा, चीतल, भेडिय़ों और वानस्पतिक प्रजातियों के पेड़ पौधों की हलचल के नजारों से रूबरू होते है।

अभयारण्य के सूत्रों के अनुसार अभयारण्य में इन दिनों प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। नौरादेही अभयारण्य इनकी पसंदीदा शरण स्थली मानी जाती है। अभ्यारण में साईबेरियन पक्षियों के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। लगातार प्रटोलिंग कर इनकी निगरानी की जा रही है।

नौरादेही के पक्षियों से तालमेल

साईबेरियन पक्षी नौरादेही अभयारण्य के केटलइरगेट, ब्जेकबिंग्ड, ग्रेहार्नबिल, स्टिल्ड, अबाबील, सारसक्रेन, पिनटेल, किलकिला, तोता, मैना, नीलकंठ, बगुला, गौरेया, चील आदि पक्षियों से बेहतर तालमेल बैठाते है जिससे इनके बीच संघर्ष होने की नौबत नहीं आती है। अभयारण्य में एक डेढ़ माह ठहरने के बाद तापमान में वृद्धि महसूस होने पर ये पक्षी यहां से वापिस होंगे।

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