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युवराज बोले- घबराना नहीं, बच्चे के सामने दु:खी मत होना

इंदौर में 10 साल से ब्लड कैंसर से लड़ रहे 11 साल के फेन रॉकी से की मुलाकात भास्कर न्यूज | इंदौर किंग्स इलेवन पंजाब के...

Danik Bhaskar | May 11, 2018, 03:10 AM IST
इंदौर में 10 साल से ब्लड कैंसर से लड़ रहे 11 साल के फेन रॉकी से की मुलाकात

भास्कर न्यूज | इंदौर

किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाड़ी युवराज सिंह ने गुरुवार को अपने 11 साल के नन्हें फेन रॉकी से मुलाकात की, जो दस साल से ब्लड कैंसर से लड़ रहा है। रॉकी का बोन मेरो ट्रांसप्लांट होना है और उसे शुक्रवार को भर्ती किया जाएगा। बच्चे का हौंसला देखकर युवराज भी उसके फेन हो गए। बच्चे से हाथ मिलाया। उसे स्कूल बैग, कैप और टी-शर्ट ताेहफे में दी।

शाम को मां हर्षा, बहन मोना और पिता निशांत दुबे के साथ रॉकी होलकर स्टेडियम पहुंचा। उसे यह भी पता है कि शुक्रवार को उसे अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। छह महीने तक उसे अस्पताल में रहना होगा लेकिन युवराज सिंह से मिलने की खुशी से उसका चेहरा दमक रहा था। युवराज सिंह खुद फेफड़े के कैंसर की बीमारी से लड़ चुके हैं। इसलिए दर्द समझते हुए उन्होंने रॉकी के पिता निशांत दुबे का हौंसला बढ़ाया। वे बोले कि-बस घबराना मत। खासकर कभी भी बच्चे के सामने दु:खी मत होना। मैं इस बीमारी को हराया है। यह भी इससे जीत जाएगा।

रॉकी को पिता देंगे बोन मेरो : पिता निशांत दुबे ने बताया कि जब वह एक साल का था तब हमें पता चला कि उसे ब्लड कैंसर है। 2008 से उसका इलाज करवा रहे हैं। बच्चे की देखरेख के लिए नौकरी भी छोड़ दी। बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प है। इसलिए बीएमटी के लिए शुक्रवार को उसे अस्पताल में भर्ती करेंगे। मैं उसे बोन मेराे दूंगा।

मैं भी युवराज की तरह खेलना चाहता हूं

जब युवराज बच्चे से मिले तो पलभर के लिए वह कुछ बोल भी नहीं पाया। रॉकी कहते है कि युवराज ने छह बाल पर छह छक्के लगाए थे। इसलिए वो मुझे बहुत पसंद है। मैं भी ऐसा ही खेलना चाहता हूं। पढ़ने में भी रॉकी अच्छा है लेकिन बीमारी के कारण नियमित स्कूल नहीं जा पाता। उसे गाने का शौक है। स्टेमिना कम है, इसलिए आम लोगों की तरह क्रिकेट नहीं खेल पाता। मां हर्षा कहती हैं कि उसे उसकी बीमारी के बारे में नहीं पता है।