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वर्कफोर्स और कमाई के बढ़ने से भारत में सोने की मांग तेजी से बढ़ेगी

आने वाले दिनों में भारत और चीन में सोने की ज्वैलरी में नया ट्रेंड देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत रूप से तो दोनों...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:20 AM IST
आने वाले दिनों में भारत और चीन में सोने की ज्वैलरी में नया ट्रेंड देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत रूप से तो दोनों देशों में औसत डिमांड कम होगी। लेकिन भारत में युवा आबादी और कामकाजी लोगों की संख्या बढ़ने के कारण कुल मिलाकर डिमांड काफी बढ़ जाएगी। चीन में ट्रेंड खपत बढ़ने की ओर है, इसलिए वहां भी डिमांड बढ़ेगी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट ‘गोल्ड 2048’ में यह बात कही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में तीन दशक तक सबसे तेज इकोनॉमी बने रहने की क्षमता है। सरकार ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगर वह ऐसा करने में सफल रहती है तो भारत में निकट भविष्य में सोने की मांग में तेजी से इजाफा होगा। लेकिन लांग टर्म में मांग बढ़ने की गति कम होगी। इंडस्ट्री के बारे में इसका अनुमान है कि ज्वैलरी ट्रेड काफी हद तर संगठित क्षेत्र के दायरे में आएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक ज्वैलरी की डिमांड विकसित देशों में भी बढ़ेगी, लेकिन विकासशील देश इस मामले में आगे रहेंगे। भारत और चीन के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया और कंबोडिया से मांग निकलेगी। 2035 तक हर साल दुनियाभर में 17 करोड़ लोग मध्य वर्ग में जुड़ेंगे। इसमें सबसे ज्यादा भारत और चीन के होंगे। चीन के बारे में इसने कहा है कि वहां पारंपरिक मांग 24 कैरेट वाले सोने की ज्वैलरी की है। लेकिन आगे इसमें कमी आएगी। इसकी जगह 18 और 22 कैरेट वाले सोने के गहनों की मांग बढ़ेगी। 24 कैरेट वाले गहने भी होंगे, लेकिन आधुनिक तकनीक के कारण वे अपेक्षाकृत हल्के होंगे।

रिसाइक्लिंग के लिए देश में 25,000 टन सोना

भारत में सोने की मांग बढ़ने के मुख्य कारण




रिसाइक्लिंग से आयात की जरूरत कम

भारत में सोने की रिसाइक्लिंग यानी दोबारा इस्तेमाल की काफी गुंजाइश है। यहां करीब 25,000 टन सोना ज्वैलरी के रूप में है। इससे सोने के आयात की जरूरत कम होगी।

मध्य वर्ग कुल आबादी का 19%, 2048 में 73% होगा

वर्ग 2018 में संख्या हिस्सा 2048 में संख्या हिस्सा

गरीब 63 45% 4 2%

निम्न मध्य 46 33% 11 6%

मध्य वर्ग 27 19% 125 73%

अमीर 3 2% 31 18%

(संख्या करोड़ में, 2.5 लाख से कम आय वाले गरीब, 5.5 लाख तक निम्न मध्य वर्ग, 27.50 लाख तक मध्य वर्ग और इससे ज्यादा आय वाले अमीर)

चीन-ऑस्ट्रेलिया सबसे बड़े उत्पादक

चीन सबसे बड़ा उत्पादक है। 2016 में यहां 464 टन सोना उत्पादन हुआ। ऑस्ट्रेलिया 274 टन के साथ दूसरे नंबर पर है।

खदानों में 55,000 टन सोना: खदानों में करीब 55,000 टन सोना होने का अनुमान है। इसे 15 साल में निकाल लिया जाएगा। दूसरे स्रोतों में 1.1 लाख टन सोना होने के आसार हैं।