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बिहार में मक्का की आवक पुरजोर शुरू, उत्तर प्रदेश में फसल तैयार

बिहार में मक्का की आवक का दबाव बढ़ गया है। अनेक राज्यों में यहां से आपूर्ति हो रही है। आने वाले दिनों में इंदौर तक...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 04:15 AM IST

बिहार में मक्का की आवक का दबाव बढ़ गया है। अनेक राज्यों में यहां से आपूर्ति हो रही है। आने वाले दिनों में इंदौर तक पड़तल लगना शुरू हो सकती है। उप्र में हाल ही में हुई वर्षा से मक्का की फसल को लाभ हुआ है। अगले 15-20 दिन में नई फसल मंडियों में आना शुरू हो जाएगी। बिहार में स्पॉट से मक्का 1050 से 1100 रुपए बिकने लगी है। तेलंगाना, आंध्र, में मक्का की आवक बनी हुई है। डीजीएफटी ने आयातकों से पूर्व में किए गए सौदे और भुगतान की जानकारी मांगी है। सरकारी प्रतिबंध के आदेश के बाद दलहनों अधिकृत और तस्करी आयात कैसे हो रहा है, यह जांच का विषय है। विश्व में 2018-19 में मक्का के अंतिम स्टॉक मे 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ब्राजील में मक्का का उत्पादन 870 लाख टन अर्जेंटीना में 330 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान लगाया गया है। हाल ही में 31 अगस्त तक 5 लाख टन दलहन आयात की अधिसूचना भी जारी हो गई है।

स्टॉकिस्ट सक्रिय

मप्र के निमाड़ में स्पॉट से 1150 से 1175 रुपए महाराष्ट्र में 1100 से 1200 रुपए बिक रही है। मक्का के वर्तमान भाव देखकर स्टॉकिस्ट सक्रिय हो गए हैं। उनका मत है कि इतनी सस्ती मक्का कहां मिलेगी। 2.20 प्रतिशत मंडी शुल्क एवं बारदाना लगने के बाद मक्का की कीमत ही क्या रह गई। मक्का की उप्र एवं बिहार की फसल को देखते हुए तेजी का रुख नहीं बताया जा रहा है। 25-50 रुपए की तेजी-मंदी अनेक वजह से आती रहती है। इस वर्ष मप्र महाराष्ट्र, राजस्थान में मानसून की वर्षा अच्छी हो गई तो मक्का की बोवनी अधिक मात्रा में हो सकती है। मक्का स्टार्च का निर्यात बराबर जारी है। स्टार्च फैक्टरियों की इसी वजह से मांग बनी हुई है। निर्यात में पड़तल नहीं बैठने की वजह से मक्का का निर्यात ठंडा है। फिर भी देश में रिकाॅर्ड उत्पादन के बावजूद मक्का के भाव पानी-पानी नहीं हो रहे हैं। मक्का की औद्योगिक खपत काफी अधिक मात्रा में बढ़ गई है।

दक्षिण में भी आवक जारी

तेलंगाना के महबूब नगर, जड़चेर्ला, नागरकर्नूल, नवाबपेट लाइन की मंडियों में पिछले दिनों प्रतिदिन 2000 बोरी मक्का की आवक हो रही थी। 1200 से 1240 रुपए, वारंगल में 1000 बोरी, केसमुद्रम में 5 हजार, सिद्दीपेट, जग्तियाल, तिरुमलगिरी, सूर्यापेट लाइन में 10 हजार बोरी मक्का की आवक हो रही थी। 1150 से 1220 रुपए के बीच व्यापार हुए। निजी व्यापारियों की खरीदी के अतिरिक्त 1425 रुपए में समर्थन भावों पर सरकारी खरीदी जारी रहने से भविष्य में यही मक्का बाजार में बिकने आने वाली है। मक्का की फसल में उत्पादकता अधिक बैठने उत्पादन में वृद्धि की आशा रखी जाती है। आंध्र के वियजनगरम, चपुरपल्ली में प्रतिदिन 50 से 60 मोटर और सालुर में 7-8 मोटर मक्का की आवक हो रही थी। 1200 से 1220 रुपए लूज में बिक गई। तमिलनाडु के इरोड़, नामक्कल, उड़ूमलपेट्‌टाई लाइन के लिए लदान हो रहा था।

बिहार की मक्का में नेपाल की मांग

देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्य बिहार में ग्रीष्मकालीन मक्का की आवक बढ़कर 8 से 10 लाख बोरी दैनिक होने लगी है। बिहार के गुलाबबाग में 1.50 लाख या इससे कुछ अधिक, शिवना, मुजफ्फरनगर, मोतीहारी, नालंदा एवं आसपास की मंडियों में आवक का दबाव बढ़ गया है। नई मक्का स्पाॅट से 1050 से 1100 रुपए बिकने लगी है। बिहार की मक्का उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पं. बंगाल और नेपाल तक जा रही है। देश की स्टार्च फैक्टरियों की मांग को भी पूरा कर रही है। मप्र में बिहार की मक्का की पड़तल नहीं लग रही है। विभिन्न राज्यों की मांग कम पड़ते ही मप्र में पड़तल लगने लगेगी। वर्तमान में मक्का में दक्षिण भारत की मांग भी चल रही है। उप्र की फसल भी तैयार है। पिछले दिनों आंधी-तूफान आने की वजह से वर्षा हुई है, उसने मक्का की फसल को फायदा पहुंचाया है। अगले 15-20 दिन बाद उप्र की नई मक्का की आवक भी शुरू हो जाएगी।

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