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ऑनलाइन प्रॉपर्टी टैक्स तो जमा कर दिया, लेकिन रिकॉर्ड में बकायादार

Dainik Bhaskar

May 10, 2018, 02:40 AM IST

Sagar News - प्रदेश के 377 नगरीय निकायों में ऑनलाइन सुविधाएं देने वाला सरकार का 225 करोड़ वाला ई-नगर पालिका सिस्टम अभी तक पूरी तरह...

ऑनलाइन प्रॉपर्टी टैक्स तो जमा कर दिया, लेकिन रिकॉर्ड में बकायादार
प्रदेश के 377 नगरीय निकायों में ऑनलाइन सुविधाएं देने वाला सरकार का 225 करोड़ वाला ई-नगर पालिका सिस्टम अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। सरकारी दावों से इतर पहले ही कुछ सेवाएं ऑनलाइन मिल पा रही हैं। अब प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने की सुविधा में भी समस्या आ रही है। ज्यादातर नगर निगमों में प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने वालों के खाते से पैसा निकल गया, लेकिन जब लोग नगर निगम पहुंचे तो पता चला कि अभी अपका संपत्तिकर बकाया है। यानी ऑनलाइन पैसा जमा करने के बाद भी बकायादारों की सूची में शामिल हैं। नगरीय विकास विभाग के इस मेगा प्रोजेक्ट से एक साल बाद भी नगरीय निकायों में 18 सेवाएं ऑनलाइन मिलना संभव नहीं हो सका है। प्रमुख नगर निगमों में शामिल ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में ही कई दिक्कतें आ रही है। ग्वालियर में ही अकेले 600 से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग हैं। हैरानी की बात तो यह है कि भोपाल में संपत्तिकर को अब तक ऑनलाइन नहीं किया जा सका है।

विसंगति... अभी तक वेब पोर्टल से नहीं जुड़ पाया भोपाल नगर निगम, दूसरे नगरीय निकायों में संपत्तिकर ऑनलाइन जमा करने के बाद भी न रसीद मिल रही और न ही बकायादारों की सूची से मुक्ति, अब तक ऑनलाइन नहीं हो पाईं 18 सेवाएं

परेशानी... टैक्स जमा करने के बाद भी काट रहे चक्कर

प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के लिए वेबसाइट या एप पर जाने से कंपनी की लिंक से जुड़ते हैं। जैसे ही कोई खातेदार अपना संपत्तिकर जमा करता है तो उसे पैसे जमा होने का मैसेज आ जाता है। पैसे जमा करने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स जमा होकर भी रसीद नहीं मिलने से दिक्कत होती है। संबंधित के खाते से पैसा कट जाता है, लेकिन नगर निगम के रिकॉर्ड में पता करने पर बकाया ही दिखा रहा है, जबकि खाताधारक को नगरीय विकास के खाते में पैसा जाने का संदेश मिलता है। नगर निगम के बकाया बताने पर साफ नहीं हो रहा है कि ये पैसा किस खाते में चला गया है। इस गफलत की वजह से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने वाले दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

2015 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट

ई- नगर पालिका प्रोजेक्ट पर काम 2015 में शुरू हुआ था। नगरीय विकास ने 225 करोड़ रुपए में यूएसटी ग्लोबल कंपनी को प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा था। इसमें 377 नगरीय निकायों को शामिल किया गया, जिसमें ऑनलाइन सेवाएं मिलना थीं। कर्मचारियों का वेतन और पेंशन सिस्टम भी ऑनलाइन होना था।

अभी डेटा नहीं मिल पाया है


अभी भी अधूरा है प्रोजेक्ट

यूएसटी ग्लोबल ने नगरीय निकायों के साथ पूरा सेटअप तैयार करने में दो साल लगा दिए। 1 अप्रैल 2017 से इसे ऑपरेशनल कर दिया गया। अगले 5 साल तक कंपनी के पास मेंटेनेंस और संचालन का जिम्मा होगा। एक साल से ज्यादा हो गया, लेकिन किसी भी नगरीय निकाय में सारी सेवाएं ऑनलाइन नहीं मिल रही हैं।

चल रही है जांच

इस मामले की जांच लोकायुक्त में चल रही है। गलत तरीके से काम देने के मामले में पुरानी शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन ने सारा रिकॉर्ड जब्त कर लिया था। नगरीय विकास संचालनालय के अफसरों से पूछताछ भी हो चुकी है।

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