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महारूद्र यज्ञ में 61 जोड़े दे रहे आहूतियां

भास्कर संवाददाता। फुटेराकलां बटियागढ़ ब्लॉक के बकायन गांव में साध्वी कुंती देवी के आश्रम में 11 कुंडीय महारूद्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 04:20 AM IST

महारूद्र यज्ञ में 61 जोड़े दे रहे आहूतियां
भास्कर संवाददाता। फुटेराकलां

बटियागढ़ ब्लॉक के बकायन गांव में साध्वी कुंती देवी के आश्रम में 11 कुंडीय महारूद्र यज्ञ का आयोजन चल रहा है। जिसमें सुबह 9 बजे से वैदिक मंत्रोपचार द्वारा पूजा अर्चना, शिवलिंग निर्माण के बाद आरती की जाती है। दोपहर 11 बजे एक बजे तक ग्यारह कुंडियों में जजमानों के 61 जोड़े आहूतियां दे रहे हैं। शाम 4 से 7 बजे तक प्रवचन एवं रात में रामलीला के मंचन का ग्रामीणों द्वारा लाभ लिया जा रहा है। वहीं शाम के समय सैकड़ों श्रद्धालु यज्ञ की परिक्रमा करते हैं।

इस अवसर पर यज्ञाचार्य मृदुल बिहारी ने बताया कि सृष्टि के रचियता ब्रम्हाजी ने प्रयाग में यज्ञ किया। सतयुग में राजा मरूत ने यज्ञ किया ताकि सृष्टि में संतुलन बना रहे। त्रेतायुग में राजा दशरथ ने यज्ञ का ब्रम्हांड के नायक भगवान राम को पुत्र के रूप में प्राप्त किया। द्वापर में पांडवों ने यज्ञ अनुष्ठान कर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि यज्ञ से प्राणियों के साथ-साथ वायुमंडल शुद्ध होता है। तिल व घीर की आहूतियों से वातावरण में विशेष सुगंध घुल जाती है। जिससे मानव व देवताओं को तृप्ति मिलती है।

भास्कर संवाददाता। फुटेराकलां

बटियागढ़ ब्लॉक के बकायन गांव में साध्वी कुंती देवी के आश्रम में 11 कुंडीय महारूद्र यज्ञ का आयोजन चल रहा है। जिसमें सुबह 9 बजे से वैदिक मंत्रोपचार द्वारा पूजा अर्चना, शिवलिंग निर्माण के बाद आरती की जाती है। दोपहर 11 बजे एक बजे तक ग्यारह कुंडियों में जजमानों के 61 जोड़े आहूतियां दे रहे हैं। शाम 4 से 7 बजे तक प्रवचन एवं रात में रामलीला के मंचन का ग्रामीणों द्वारा लाभ लिया जा रहा है। वहीं शाम के समय सैकड़ों श्रद्धालु यज्ञ की परिक्रमा करते हैं।

इस अवसर पर यज्ञाचार्य मृदुल बिहारी ने बताया कि सृष्टि के रचियता ब्रम्हाजी ने प्रयाग में यज्ञ किया। सतयुग में राजा मरूत ने यज्ञ किया ताकि सृष्टि में संतुलन बना रहे। त्रेतायुग में राजा दशरथ ने यज्ञ का ब्रम्हांड के नायक भगवान राम को पुत्र के रूप में प्राप्त किया। द्वापर में पांडवों ने यज्ञ अनुष्ठान कर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि यज्ञ से प्राणियों के साथ-साथ वायुमंडल शुद्ध होता है। तिल व घीर की आहूतियों से वातावरण में विशेष सुगंध घुल जाती है। जिससे मानव व देवताओं को तृप्ति मिलती है।

विश्वास व श्रद्धा का केंद्र है यह आश्रम: मृदुल बिहारी

मृदुल बिहारी ने कहा कि यह तपोभूमि साध्वी कुंती देवी की है। जहां विधि विधान से शुक्रवार को राधा-कृष्ण भगवान की आश्रम में प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिनके दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। उन्होंने कहा कि यह आश्रम विश्वास व श्रद्धा का केंद्र है जहां पर भक्तों द्वारा अखंड रामधुन का आयोजन किया जा रहा है।

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