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हरदुआ मानगढ़ के करके गांव में राज्यमंत्री के आदेश पर ईई ने भेजी बोरिंग मशीन, सरपंच ने अपने खेत में करा लिया बोर

भास्कर संवाददाता| ओमप्रकाश शर्मा जबेरा जनपद के हरदुआ मानगढ़ के करके गांव के जलसंकट की भयावह तस्वीरों ने पूरेे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:15 AM IST

हरदुआ मानगढ़ के करके गांव में राज्यमंत्री के आदेश पर ईई ने भेजी बोरिंग मशीन, सरपंच ने अपने खेत में करा लिया बोर
भास्कर संवाददाता| ओमप्रकाश शर्मा

जबेरा जनपद के हरदुआ मानगढ़ के करके गांव के जलसंकट की भयावह तस्वीरों ने पूरेे देश का ध्यान खींचा। पीएचई के राज्यमंत्री ने अधिकारियों को गांव में बोरिंग करने का आदेश भी दिया, लेकिन यह आदेश लापरवाही की भेंट चढ़ गया। पीएचई ने गांव में बोरिंग मशीन भेजी, तो सरपंच ने गांव में बोरिंग न कराकर अपने घर के खेत में करा दिया। इस बोर में बंपर पानी भी निकल आया, लेकिन जब ईई मौके पर पहुंचे तो चकरा गए। उन्हें बोर नहीं मिला। ग्रामीणों से पूछा तो उनहोंने बताया कि यहां पर कोई बाेर नहीं हुआ। पहले की तरह तलैया और कुएं का दूषित पानी पी रहे हैं। ईई ने सरपंच को तुरंत फोन लगाया, लेकिन सरपंच ने कोई जवाब नहीं दिया।

यहां पर बता दें कि करके गांव में भीषण जल है। यहां पर 40 फिट कुएं में उतरकर ग्रामीण बंूद-बूंद पानी भरने में जुटे हैं। भास्कर ने इस मुद्दे को तस्वीरों के माध्यम से उठाया था। जिसके बाद पीएचई मंत्री जालम सिंह ने इसे संज्ञान में लिया था और ईई को बोर कराने का आदेश दिया था। दो बार ईई गांव में गए, उन्हांेने बोरिंग मशीन भी भेजी, लेकिन सरपंच ने अधिकारियों को अंधेरे में रखकर अपने खेत में बोर करा लिया। ऐसी स्थिति में एक सप्ताह बीतने के बाद भी आदिवासी बाहुल्य करके गांव के लोग जलसंकट से जूझ रहे हैं।

कुएं और तालाब का प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ग्राम के गणेश, देवी शंकर, अजुद्दी, फूलरानी इंद्राणी मीरा ने बताया कि करके गांव में पेयजल स्रोत के नाम पर दो कूप हैं जिनकी तलहटी में भी जल नहीं है। दो हैंडपंप हैं, एक बंद हो गया है। एक हैंडपंप में दो दिन पहले सुधार के बाद चालू हुअा है। उसमें भी पानी नहीं है। एक हजार की आबादी पीने के पानी के लिए 24 घंटे इस हैंडपंप पर जूझती है। जिसकी बजह से मजबूरी में तालाब का मटमैला प्रदूषित पानी पेयजल के रूप में उपयोग कर रहे हैं।

बनवार। करके गांव में 26 मई को बोरिंग की जाना थी, जिसे बाद में सरपंच द्वारा अपने खेत के पास करा ली गई।

ग्रामीण बोले: जानकारी

नहीं पानी निकला या नहीं

करके के नवीन बोर में भी नहीं निकला पानी, ग्रामीण बोले रात्रि में बोरिंग मशीन आई थी और सरकारी जगह पूूंछकर बोर करके चलती बनी ग्रामीणों का कहना है कि रविवार की रात्रि में बोरिंग मशीन करके गांव आई थी और ग्रामीणों से सरकारी जमीन पूंछकर रात्रि में बोर करके चली गई। बोर में पानी निकला की नहीं, जानकारी तक नहीं दी। जब ग्रामीण सुबह उठे तो बोर पर पत्थर रखा मिला। बोरिंग मशीन नही मिलीं। यहां पर गड्डा सूखा पड़ा हुआ मिला। हैरानी की बात यह है कि पहले पीएचई के ईई केएस पवार ने बताया था कि हरदुआ से करके के कुंआ में पाइप डालकर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। लेकिन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं है। न तो पाइप लाइन बिछाई गई है और न ही हैंडपंप लगा है। इस संबंध में ईई का कहना है कि सरपंच ने धोखे में रखकर अपने खेत में बोर करा लिया है। सूचना मिलने पर मैंने उससे पूछताछ की थी। दूसरा बोर कराया है, लेकिन उसमें पानी नहीं निकला है।अब वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन ले रहे हैं।

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