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सिद्धों की झिरिया बुझा रही देवतरा गांव के लोगों की प्यास

बनवार | जनपद जबेरा की ग्राम पंचायत पोंडी के वनांचल में बसे देवतरा गांव में पीने के पानी की किल्लत से पूरा गांव जूझ...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:15 AM IST
सिद्धों की झिरिया बुझा रही देवतरा गांव के लोगों की प्यास
बनवार | जनपद जबेरा की ग्राम पंचायत पोंडी के वनांचल में बसे देवतरा गांव में पीने के पानी की किल्लत से पूरा गांव जूझ रहा है। वही मवेशियों व वन्य जीव को 10 किमी पर जंगली क्षेत्र में कोई पेयजल स्रोत नहीं है। जिसकी वजह से प्यासे मवेशी व वन्य जीव की एक दर्जन से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

300 की आबादी में जंगल में बसे गांव देवतरा के लिए कहने को पांच हेंडपंप व दो कुंआ हैं लेकिन जलस्तर गिरने से सभी हैंडपंप पानी की जगह हवा फेंक रहे हैं। वहीं कुएं भी सूख गए हैं। स्थिति यह है कि गांव में पेयजल स्रोतों से लोगों को एक बंूद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे अब ग्रामीणों को गांव से एक किमी दूर धार्मिक स्थल सिद्धों की झिरिया से पीने के पानी को सिर पर मटके व पीले कुप्पे उठाकर लाना पउ़ रहा है। रोजाना दर्जनों महिलाएं जंगली रास्ते से सुबह शाम पानी के लिए मशक्कत करती नजर आती हैं। ग्रामीणों को तो जैसे-तैसे सिद्धों की झिरिया से पानी मिल जाता है लेकिन मवेशियों को पानी नहीं मिल पा रहा है। जो प्यास से व्याकुल हो रहे हैं। गांव के मुलायम सिंह, दुर्जन सिंह ने बताया कि देवतरा गांव में पेयजल के स्रोत में एक बंूद भी पानी नहीं है। ऐसी स्थिति में पूरा गांव जंगल के प्राकृतिक झिरिया के सहारे प्यास बुझाने के लिए मजबूर है। यदि यह झिरिया नहीं होती तो गांव में अकाल जैसी स्थिति निर्मित हो जाती या फिर लोगों को गांव छोड़कर जाना पड़ता। लेकिन यह झिरिया पूरे गांव के लोगों के लिए वरदान बनी हुई है। इसका पानी कभी भी खत्म नहीं होता। है। बसंत राय ने बताया कि वनांचलों में बसे ग्रामीण अंचलों में पेयजल के लिए शासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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