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शिक्षकों के लिए गले की फांस बन गया नि:शुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम

जनपद मुख्यालय से स्कूल तक साइकिलें ले जाने का परिवहन लग रहा जेब से भास्कर संवाददाता| जबेरा सरकारी मिडिल व...

Danik Bhaskar | May 09, 2018, 03:15 AM IST
जनपद मुख्यालय से स्कूल तक साइकिलें ले जाने का परिवहन लग रहा जेब से

भास्कर संवाददाता| जबेरा

सरकारी मिडिल व हाईस्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की महत्वाकांक्षी निशुल्क साइकिल वितरण योजना शिक्षकों के गले की फांस बन गई है। स्कूलों में छ़ुट्टियां होने के बावजूद भी बच्चों को साइकिल लेने स्कूल जाना पड़ रहा है। शिक्षकों के लिए स्वयं ही स्कूल से 50 किमी दूर जनपद मुख्यालय तक साइकिलें लेने जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जनपद शिक्षा केंद्र से स्कूल तक साइकिलें ले जाने का परिवहन खर्च भी शिक्षकों को ही अपनी जेब से देना पड़ रहा है।

दरअसल इस बार निशुल्क साइकिलें शिक्षा सत्र खत्म होने के बाद छुटिट्यों के समय स्कूल में पहुंची हैं, जिसका वितरण कार्य स्कूल की छुट्टियों के दिनों में शिक्षकों को करना पड़ रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जनपद मुख्यालय तक साइकिलों की खेप स्कूल बंद होने पर पहुंचाई गई है। वहीं दर्जनों स्कूल ऐसे हैं जो जनपद मुख्यालय से 50 ये 80 किमी दूर हैं।

मिडिल स्कूलों के लिए 494 बालक व 497 बालिकाओं के लिए निशुल्क साइकिलों का स्टॉक जबेरा के मॉडल स्कूल में किया गया है, जिसका उठाव कार्य मिडिल स्कूल के प्रभारियों के द्वारा स्वयं के खर्चे पर स्कूल तक करके साइकिलों का वितरण करना पड़ रहा है। शिक्षक रूपलाल, विजय, राजकुमार ने बताया कि शासन की दोहरी नीति से शिक्षक खासे परेशान हैं। एक ओर छुट्टी के दिनों में हम लोगों को बच्चों को स्कूल बुलाकर साइकलें देना पड़ रही हैं, दूसरी ओर जनपद मुख्यालय से स्कूल तक साइकिलों लाने के लिए स्वयं ही राशि अपनी जेब से लगानी पड़ रही है।

हमारे पास परिवहन का कोई बजट नहीं