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डंठल की कटाई कर रहे हैं किसान, ताकि भूसा पशुओं को खिला सकें

रतलाम (जितेंद्र श्रीवास्तव) | खेतों में नरवाई जलाने वाले किसानों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। गेहूं की कटाई...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:15 AM IST
रतलाम (जितेंद्र श्रीवास्तव) | खेतों में नरवाई जलाने वाले किसानों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। गेहूं की कटाई के बाद अब खेतों में नरवाई नहीं जलाई जा रही है। बल्कि मशीन (स्ट्रारीपर) से डंठल की कटाई की जा रही है। अब अधिकतर किसान इसी प्रक्रिया से गेहूं की कटाई के बाद डंठल को निकलवा रहे हैं। गेहूं की कटाई के बाद खेतों में आग की लपटें और धुआं उठता नजर आता है। दरअसल ये आग की लपटें किसानों द्वारा खेतों में जलवाई जाने वाली नरवाई की होती है। अब अधिकतर किसान खेतों में कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा गेहूं की फसल की कटाई के बाद गेहूं के डंठलभूसे को एकत्रित कर रहे हैं और फिर स्ट्रा रीपर से इसकी कटाई कर रहे हैं। इससे कटाई से डेढ़ इंच ऊपर से करता है इसकी वजह से फसल के अवशेष को आसानी से निकाला जाता है। इससे कटाई करने से किसान भुसा को बेच भी सकता है और प्रदूषण नहीं होता है।

रीपर से कटाई कर इकट्‌ठा करते हैं भूसा

शिवपुर के किसान राधेश्याम चौधरी ने बताया नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण होता है। साथ ही आसपास के खेतों में भी आग लगने की संभावना रहती है। ऐसे में इसे बंद कर दिया है। अब भूसे निकलने से फायदा हो रहा है और यह पशुओं को खिलाने के काम आ रहा है। नौगांवा के किसान संजय पाटीदार ने बताया नरवाई जलाने से किसान किट नष्ट होते हैं। इससे अब किसान धीरे-धीरे इससे दूर हो रहे हैं। अब अधिकतर किसानों द्वारा रीपर की मदद से कटाई कर भुसा निकाल रहे है। यह पशुओं के लिए खिलाने के भी काम आ रहा है। किसान दिलीप गोरमाने बताया अब ज्यादा ज्यादा किसान नरवाई नहीं जलाते है। किसान अपने अपने खेतों की रीपर द्वारा कटाई कर भुसा इकट्ठा कर रहे हैं। लुनेरा के किसान मानवेंद्र जोधा ने बताया प्रशासन द्वारा रोक लगाने से अब किसान नरवाई नहीं जला रहे हैं घास का फायदा हो रहा है।