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ओरछा रोड पर जामनी और बेतवा नदी के पुल निर्माण न होने से एक दर्जन गांवों में समस्या, बारिश में फिर बंद होगा आम रास्ता

बारिश के मौसम में हर बार की तरह इस बार भी पृथ्वीपुर से ओरछा रोड पर यातायात प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। वाहनों का...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 04:35 AM IST

बारिश के मौसम में हर बार की तरह इस बार भी पृथ्वीपुर से ओरछा रोड पर यातायात प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

वाहनों का आवागमन बंद होते ही एक दर्जन गांवों के हजारों लोगों की मुसीबत बढ़ जाएगी। उन्हें ओरछा और झांसी जाने के लिए 40 किमी लंबा सफर तय करना पड़ेगा। यात्री बसों के बंद हो जाने से आने जाने के लिए साधन भी नहीं मिलेंगे। 3 माह ग्रामीणों के लिए मुसीबत भरे होंगे। सालों से लोग इस समस्या से परेशान हैं, लेकिन जिला प्रशासन इसका समाधान नहीं कर सका है। दरअसल ओरछा रोड पर जामनी और बेतवा नदी पर राजशाही दौर में बनाए गए पुल से काम चल रहा है। बारिश के मौसम में दोनों नदियां उफान पर आ जाती हैं। पानी पुलों को डुबो देता है। पिछले कुछ सालों में हुए हादसों की वजह से प्रशासन द्वारा बारिश में 3 माह तक आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। आजादी के 65 साल बाद भी बेतवा और जामनी नदी पर नए पुलों का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि प्रदेश सरकार ने इस बार बजट में पुल के निर्माण को शामिल किया है। लेकिन काम शुरु होने में काफी समय लगेगा। 5 साल पहल भी प्रदेश सरकार ने पुलों के निर्माण के लिए स्वीकृति देकर राशि जारी की थी। एमपीआरडीसी को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एमपीआरडीसी ने पुलों के निर्माण के लिए दो बार टैंडर निकाले। दोनों बार टैंडर भी स्वीकृत किए गए, लेकिन ठेका कंपनियों ने काम शुरू नहीं किया। यातायात के साधन बंद हाे जाने से मरीजों और प्रसूता महिलाओं इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। उन्होंने आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं होते। कई बार गर्भवती महिलाओं की जान संकट में आ जाती है।

समस्या

ओरछा और झांसी जाने के लिए 40 किमी लंबा सफर तय करना पड़ेगा

एक दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित

ओरछा रोड पर बसों और निजी वाहनों का आवागमन बंद हो जाने से आसपास के एक दर्जन गांवों के लोगों को यातायात के साधन उपलब्ध नहीं होते हैं। इन गांवों का यातायात संपर्क लगभग टूट जाता है। पृथ्वीपुर से ओरछा के बीच बसे लोटना, सिंहपुरा, चंद्रपुरा, इकबालपुरा, ढिमरपुरा पानी से चारों ओर से घिर जाते हैं। वहीं अतर्रा, दर्रेठा, विशनपुरा, नैगुंवा, पनिहारी, सकेराखुर्द, सेवारी सहित चार दर्जन से अधिक ग्रामों के लोग का आवागमन बंद हो जाता है।

सालों से झेल रहे त्रासदी

बारिश के मौसम में सालों से लोग त्रासदी झेल रहे हैं। लोटना गांव के भरत यादव ने बताया कि रास्ता बंद हो जाने से बारिश के समय सबसे अधिक परेशानी होती है। संतोष प्रजापति ने बताया कि बारिश में कई बार घरों की छप्पर तक टूट जाती है। सामान लाने के लिए साधन तक नहीं मिलते। दर्रेठा गांव के राजेंद्र द्विवेदी ने का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। ज्यादातर लोग इलाज कराने झांसी जाते हैं। यातायात के साधन बंद हो जाने से किराए के वाहन लेकर जाना पड़ता है। वाहन चालक मनमाना किराया लांगते हैं।

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