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किसानों के लिए आए करोड़ों के यंत्र रखे-रखे हुए कबाड़

छह साल पहले प्रारंभ की गई कस्टम हायरिंग योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। शासन की ओर से सोसायटियों को दिए गए...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 05:00 AM IST

किसानों के लिए आए करोड़ों के यंत्र रखे-रखे हुए कबाड़
छह साल पहले प्रारंभ की गई कस्टम हायरिंग योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। शासन की ओर से सोसायटियों को दिए गए करोड़ों रुपए के कृषि यंत्र जर्जर हो चुके हैं। कई जगह तो कृषि यंत्र दो साल से बिगड़े पड़े हैं। न तो उन्हें सुधारा जा रहा है और न ही उनके बारे में कोई निर्णय लिया जा रहा है। कई यंत्र समितियों ने खुर्दबुर्द तक कर दिए हैं, अधिकारियों के पास भी इनका कोई रिकार्ड नहीं है। ऐसे में शासन की ओर इन यंत्रों पर खर्च की गई राशि पानी में चली गई है।

दरअसल 2012 में शुरू की गई इस योजना के तहत जिले की 65 सोसायटियों में कस्टम हायरिंग केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें से तहसील पथरिया की पथरिया सोसायटी, सूखा, सतपारा, बांसाकलां, जेरठ, बोतराई, केवलारी के लिए भी करीब एक करोड़ से अधिक राशि के कृषि यंत्री दिए गए थे। हर सोसायटी के लिए एक-एक ट्रैक्टर, एक प्लाऊ, एक रोटावेटर, एक कल्टीवेटर, एक सीडड्रिल कम फर्टिलाइजर ड्रिल व एक ट्रैक्टर चलित थ्रेसर उपकरण दिया गया था। यह उपकरण किसानों को 550 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से किराए पर दिए जाने थे। ताकि जिन किसानों के पास कृषि यंत्र नहीं हैं वह आसानी से खेती कर सकें। लेकिन समितियों द्वारा कृषि यंत्रों का रख-रखाव न किए जाने एवं अपने चहेतों को इसका लाभ देने के कारण किसानों का इस योजना के प्रति मोह भंग हो गया।

पथरिया। सेवा सहकारी सोसायटी पथरिया में रखे कृषि यंत्र कबाड़ में तब्दील हो गए हैं।

यह काम हमारा नहीं

वहीं सहकारी बैंक के अधिकारियों का कहना है कि समितियों को कृषि यांत्रकीय विभाग द्वारा कस्टर योजना के तहत जो यंत्र दिए गए थे उनकी मॉनीटरिंग का काम उन्हीं को करना था, लेकिन उन्होंने यंत्र देने के बाद योजना के बारे में ज्यादा ध्यान नहीं दिया। यही कारण कि अधिकांश यंत्र रखे-रखे बंद पड़े हैं। समितियों का काम केवल यंत्रों को किसानों तक पहुंचना व किराया लेना है।

समितियों को करना थी देखरेख

योजना के शुरूआत में ही समितियों को सामग्री प्रदान की गई थी। जिसके तहत कृषि यंत्रों के किराए से मिलने वाली राशि से उनका मेंटनेंस करना था, लेकिन अधिकांश समितियों ने इसकी ओर ध्यान ही नहीं दिया। जिससे अधिकांश सोसायटियों में रखा सामान खराब पड़ा है।- एनके मेहरा, सहायक कृषि यंत्रीय अधिकारी

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