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नालों की सफाई पर हर साल लाखों खर्च, हालात जस के तस

बरसात पूर्व शहर के बड़े नालों की सफाई पर नगर निगम हर साल लाखों रुपए खर्च कर रहा है। इस बार भी यह काम शुरू हुआ है,...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 04:00 AM IST

नालों की सफाई पर हर साल लाखों खर्च, हालात जस के तस
बरसात पूर्व शहर के बड़े नालों की सफाई पर नगर निगम हर साल लाखों रुपए खर्च कर रहा है। इस बार भी यह काम शुरू हुआ है, लेकिन इसका नतीजा कुछ नहीं निकलता। तेज बारिश हाेने पर शहर की निचली बस्तियों में घरों तक पानी पहुंच ही जाता है।

पिछले साल तो नगर निगम परिसर तक में पानी भर गया था। जानकारों का मानना है कि जब तक नाले, चौड़े और गहरे नहीं होंगे तब तक ड्रेनेज सिस्टम सुधर नहीं सकता। यह तभी संभव है जब नालों से अतिक्रमण हटाया जाए।

नालों पर अतिक्रमण की गंदगी

वन विभाग के सामने अवैध कब्जे से नाले का स्वरूप ही बदल गया

विवि पहाड़ी का पानी

बनता है मुसीबत

विश्वविद्यालय पहाड़ी का पानी पहले कई हिस्सों में शहर की तरफ बहता था, लेकिन बाउंड्रीवॉल, स्टेडियम व रोड बनने के बाद अब एक ही स्थान से पहाड़ी का पानी तेज बहाव के साथ तहसीली रोड से लगे दो-तीन नालों से बहकर कॉलोनी में भरता है। शिवाजीनगर, मधुकरशाह वार्ड, गोपालगंज व वृंदावन वार्ड के ज्यादातर इलाकों में बरसाती पानी भरता है।

नाला सफाई में लेबर, मशीनरी का कहां-कितना उपयोग, रिकाॅर्ड ही नहीं

नालों की सफाई का नगर निगम के पास कोई हिसाब किताब ही नहीं है। पूरा काम अंदाज से चलता है। बकायदा पोकलेन व प्लेसमेंट पर सफाई कर्मी लगाकर 8-10 लाख रुपए नाले की सफाई में साफ कर दिए जाते हैं। सालों से ऐसा ही चलता आ रहा है। निगम के स्वास्थ्य विभाग से शहर के बड़े नालों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई के बारे में पूछा गया तो अफसर निरुत्तर रहे। निगम के तकनीकी अमले से काम नहीं लिया जाता। हेल्थ आॅफिसर राजेश सिंह का कहना है कि हमारे पास नालों का कोई रिकॉर्ड नहीं। पहले पीडब्ल्यूडी से इंजीनियरों के मार्गदर्शन में काम होता था पर अब नहीं।

बंधान में हाइड्रोलिक गेट लगने से हल हो सकती है समस्या : अतिक्रमण हटाकर नालों की चौड़ाई बढ़ाने के साथ ही झील के माेंगा बंधान में हाइड्रोलिक गेट लगने से भी इस समस्या का हल निकल सकता है। तेज बारिश में झील का पानी वृंदावन, शिवाजी नगर, गोपालगंज व बालक कॉम्पलेक्स आदि स्थानों पर बैक होता है। हाईड्रोलिक गेट लगने से पानी बढ़ने पर माेंगा में छोड़ा जा सकता है।

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