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कंपनी के हाथ में रोजगार दफ्तर, 15 प्लेसमेंट सेंटर चलाएगी

अप्रासंगिक हो गए मप्र के रोजगार दफ्तरों में नई जान डालने के लिए राज्य सरकार ने उन्हें निजी हाथों में सौंप दिया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 04:00 AM IST

अप्रासंगिक हो गए मप्र के रोजगार दफ्तरों में नई जान डालने के लिए राज्य सरकार ने उन्हें निजी हाथों में सौंप दिया है। ये अब नए रूप में प्लेसमेंट सेंटर के रूप में दिखाई देंगे। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग ने पूणे की एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध (एमओयू) किया है जो इन सेंटरों को न केवल संचालित करेगी, बल्कि हर साल एक लाख लोगों को रोजगार भी देगी। निजी कंपनी मौजूदा रोजगार दफ्तरों को प्लेसमेंट सेंटर के रूप में विकसित करेगी। मप्र में 15 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां इतने ही सेंटर चलेंगे। इनसे पूरे मप्र के 51 जिलों के बेरोजगार व स्किल्ड युवकों को जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की रोजगार स्कीम के तहत मप्र को पांच साल के लिए 19 करोड़ रुपए मिले हैं, जिसे निजी कंपनी को दिया जाएगा।

एमओयू के बाद विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दीपक जोशी ने बताया कि रोजगार विभाग और पूणे की यशस्वी एकेडमी फॉर टेलेंट मैनेजमेंट के बीच अनुबंध किया गया है। यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के आधार पर रोजगार दफ्तरों को चलाएगी। साथ ही उन्हें ठीक भी करेगी। जोशी ने कहा कि इस करारनामे से चयनित 15 जिला मुख्यालयों पर बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के कार्य प्राथमिकता से किए जा सकेंगे। जिन जिलों में प्लेसमेंट सेंटर बनने हैं, उनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, होशंगाबाद, शहडोल, धार, खरगौन, देवास, सिंगरौली, सतना एवं कटनी जिले शामिल हैं। इन जिलों का चयन इसलिए भी किया गया, क्योंकि यहां औद्योगिक गतिविधियां अन्य जिलों की अपेक्षा ज्यादा हैं। अनुबंध के दौरान मप्र राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण के अध्यक्ष हेमंत देशमुख समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

रोजगार मेले लगाएगी कंपनी

कंपनी का तर्क है कि वह युवाओं को निजी क्षेत्र में बेहतर रोजगार के अवसर देने के लिए व्यक्तित्व विकास, सीवी लेखन तथा बाजार के ताजा हालात व डिमांड आदि की जानकारी भी उपलब्ध कराएगी। कंपनियों की जरूरत के हिसाब से युवाओं की काउंसलिंग होगी। रोजगार मेले लगाए जाएंगे।

बदलेगी व्यवस्था

हर साल एक लाख युवाओं को रोजगार दिलाएगी पुणे की कंपनी, पीपीपी मोड पर चलेंगे दफ्तर

नहीं लिया जाएगा पैसा

कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण के अध्यक्ष देशमुख का कहना है कि रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के पंजीयन से लेकर उनके प्लेसमेंट तक कोई राशि नहीं ली जाएगी। जो उद्योग प्लेसमेंट के तहत युवाओं को रखेंगे, वही उद्योग कम से कम न्यूनतम मानदेय युवाओं को देगी। इसके बाद हर साल होने वाले खर्च की राशि और उद्योग से मिलने वाले न्यूनतम मानदेय के बाद भी प्लेसमेंट सेंटर चलाने वाली कंपनी को घाटा होता है तो केंद्र से मिले 19 करोड़ के फंड से उसकी भरपाई होगी।

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