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उर्स: मेरा ईमान नबी है नबी मेरी जान नबी पर पीलीकोठी का मैदान तालियों से गूंज उठा

सागर | पीली कोठी वाले बाबा के सालाना उर्स मुबारक के मौके पर लगे मेले में रविवार अाखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग...

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 04:05 AM IST
उर्स: मेरा ईमान नबी है नबी मेरी जान नबी पर पीलीकोठी का मैदान तालियों से गूंज उठा
सागर | पीली कोठी वाले बाबा के सालाना उर्स मुबारक के मौके पर लगे मेले में रविवार अाखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जहां मेरा ईमान नबी है, नबी मेरी जान नबी है । मेरे महबूब तस्वीर तेरी। मेरे ख्वाजा मेरे दाता। कानपुर से आईं कव्वाल शीबा परवीन के इस शेर पर पीली कोठी का मैदान तालियों से गूंज उठा। मौका था पीली कोठी वाले बाबा के 68 वें उर्स का। शनिवार से शुरू हुए उर्स की दूसरी शाम रविवार को अलीगढ़ के कव्वाल गुलाम हबीब पेंटर और कानपुर की शीबा परवीन के बीच कव्वाली मुकाबला हुआ।

देर रात तक चले मुकाबले में एक ओर जहां गुलाम हबीब पेंटर ने नाते ये मेरी हकीकत है। बहुत कठिन है डगर जैसे कलमों से महफिल में रंगत ला दी। वहीं दूसरी ओर कव्वाल शीबा परवीन ने एक से बढ़़कर एक पंक्तियों से माहौल को सूफियाना बना दिया।

सागर | पीली कोठी वाले बाबा के सालाना उर्स मुबारक के मौके पर लगे मेले में रविवार अाखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जहां मेरा ईमान नबी है, नबी मेरी जान नबी है । मेरे महबूब तस्वीर तेरी। मेरे ख्वाजा मेरे दाता। कानपुर से आईं कव्वाल शीबा परवीन के इस शेर पर पीली कोठी का मैदान तालियों से गूंज उठा। मौका था पीली कोठी वाले बाबा के 68 वें उर्स का। शनिवार से शुरू हुए उर्स की दूसरी शाम रविवार को अलीगढ़ के कव्वाल गुलाम हबीब पेंटर और कानपुर की शीबा परवीन के बीच कव्वाली मुकाबला हुआ।

देर रात तक चले मुकाबले में एक ओर जहां गुलाम हबीब पेंटर ने नाते ये मेरी हकीकत है। बहुत कठिन है डगर जैसे कलमों से महफिल में रंगत ला दी। वहीं दूसरी ओर कव्वाल शीबा परवीन ने एक से बढ़़कर एक पंक्तियों से माहौल को सूफियाना बना दिया।

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