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जिस ब्लड से मां बच्चे को जन्म देती है उसे माहवारी के दौरान अशुद्ध क्यों मानते हैं : डॉ. नीना गिडियन

सागर. दैनिक भास्कर मधुरिमा क्लब के महिला स्वास्थ्य सेमिनार में शामिल हुई महिलाएं और विशेषज्ञ। अधिक उम्र में...

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 04:05 AM IST
जिस ब्लड से मां बच्चे को जन्म देती है उसे माहवारी के दौरान अशुद्ध क्यों मानते हैं : डॉ. नीना गिडियन
सागर. दैनिक भास्कर मधुरिमा क्लब के महिला स्वास्थ्य सेमिनार में शामिल हुई महिलाएं और विशेषज्ञ।

अधिक उम्र में शादी करने वाली लड़कियों को स्तन कैंसर से सावधान रहने की जरूरत

सेमिनार की शुरुआत डॉ. नीना गिडियन के वक्तव्य से हुई। जिसमें उन्होंने महिलाओं को स्तन कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के समय में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। 75 फीसदी महिलाओं एडवांस स्टेज पर पहुंचने के बाद इस बीमारी का पता चलता है, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है। स्तन कैंसर से बचने का सही उपाय है जागरूकता। स्तनों के आकार में बदलाव, कोई गठान, सूजन या ब्लड आना इसके मुख्य लक्षण हैं। आज परिदृश्य में लड़कियों की 30 साल के बाद शादी, बच्चों को स्तनपान न कराना, मोटापा और निसंतानता आदि से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता हैै। वहीं स्तन कैंसर का दूसरा बड़ा कारण अनुवांशिकता भी है। यदि किसी लड़की की मां या बहन को स्तन कैंसर हुआ है तो उसे भी बीमारी होने की संभावना ज्यादा होती है। इस बीमारी से बचने के लिए महिलाओं को नियमित रुप से स्तनों की जांच कराने और संबंधित डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है। स्तर कैंसर गंभीर बीमारी है, इसे छुपाए नहीं और बल्कि लक्षण दिखाई देने पर इसका तुरंत इलाज कराएं।

बच्चों को कैंसर के बारे में पढ़ा रही थी, तभी पता चला कि मैं भी इसकी शिकार हूं

सेमिनार के दौरान स्तन कैंसर को हराकर फिर से अपनी जिंदगी जीने वाली गोपालगंज निवासी सुषमा जैन भी उपस्थित थी, जिन्होंने अपने अनुभव महिलाओं से साथ सांझा किए। उन्होंने बताया कि वे बायोलॉजी की शिक्षक हैं। जब वे कक्षा में बच्चों को कैंसर के प्रकार पढ़ा रहीं थी, उसी दौरान उन्हें खुद में भी स्तन कैंसर के लक्षण प्रतीत हुए। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए जब डॉक्टरों की सलाह पर जांच कराई तो उनका अनुमान सही निकला। चूंकि कैंसर प्राइमरी स्टेज पर था इसलिए उनका इलाज संभव हो सका। आज सुषमा इस बीमारी को हराकर सामान्य महिलाओं की तरह ही अपना जीवन जी रही हैं।

गर्मियों में बच्चों को डायरिया और डी हाइड्रेशन से बचाएं

डॉ. निधि मिश्रा
ने महिलाओं को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मियों में बच्चों को पहले से कटे हुए फल न खिलाएं। इससे उन्हें डायरिया हो सकता है। वहीं इस मौसम में डी-हाइड्रेशन और लू आदि से भी बच्चों को बचाने की जरूरत होती है। इसलिए उन्हें कार्टन के कपड़े पहनाए, धूप से सीधे कूलर या एसी में ने आने दें, रोज नहलाने और स्किन आदि का ख्याल रखें। गर्मियों में महिलाओं को यूरीनरी इंफेक्शन के ज्यादा चांस होते हैं। यदि क्रॉनिक यूरीनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन है तो इससे बुखार होता है। यदि मरीज को सुगर है तो यूटीआई जल्द ठीक नहीं होता। इसके अलावा डॉ. मिश्रा ने महिलाओं को एनीमिया, ब्लड प्रेशर और माहवारी में होने वाली समस्याओं की जानकारी दी और महिलाओं के सवालों का जवाब दिया।

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