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अपना इतिहास मत भूलो, पांव ज़मीन पर रहे ऐसा अहसास हमेशा होना चाहिए: आर्यिका

प्रत्येक माता पिता को अपना बेटा बहुत प्यारा होता है और वे अपनी क्षमता से ज़्यादा खर्च कर उसे बड़ा करके योग्य बनाते...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 04:05 AM IST

प्रत्येक माता पिता को अपना बेटा बहुत प्यारा होता है और वे अपनी क्षमता से ज़्यादा खर्च कर उसे बड़ा करके योग्य बनाते हैं। लेकिन पीड़ा बहुत होती है जब जवान बेटा बूढ़े मां बाप को वृद्धाश्रम में रहने पर मजबूर कर देता है। सोच लो बेटा कल तुम्हारा भी बुढ़ापा आएगा।

ये बात आर्यिका आदित्य मति ने तिलकगंज जैन मंदिर में रविवार को आयोजित धर्मसभा में कही। इन्होंने बताया कि जिस मां बाप ने बहू को अपनी सबसे बड़ी पूंजी अपना बेटा सौंप दिया, वही बहू कहती है कि सास ससुर ने हमें कुछ नहीं दिया। आज हर बहू चाहती है कि मायके में भाभी उसकी मां की बहुत सेवा करे । लेकिन ससुराल में हम सेवा करें, यह जरूरी नहीं । आजकल वृद्ध पिता घर दुकान में एक ईमानदार चौकीदार की तरह स्थान रखता है । माता पिता की कीमत हमें तब समझ में आती है जब हम स्वयं माता पिता बन जाते हैं । जब तुम लडख़ड़ाकर चलते थे पिता ने हर पल तुम्हारा हाथ थामा, आज पिताजी लडख़ड़ा रहे है और तुम हाथ खींच रहे हो ।

आचार्य विद्यासागर महाराज के बचन का उदाहरण देते हुए आपने कहा कि माता पिता अप नी संतान को हर क्षेत्र में बड़ा बनाना चाहते हैं और हम धरती के इन जीवंत भगवान को दुखी कर रहे हैं। माता पिता तो ऐसे हैं जिनके साथ बैठकर दो मीठी बातें भी कर लो तो पूरा दिन खुश रहते हैं। एक दंपत्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि झोपड़ी में रहकर सूखी रोटी खाकर महलों जैसा सुख भोग सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि महलों में रहने वाले अपनी जिंदगी से खुश हों ।

उन्होंने कहा कि पैसा कुछ तो है मगर सब कुछ नहीं है । जीवन में अंतरंग की शांति व भावात्मक सुखों को पैसे से नहीं खरीदा जा सकता । एक सेठ व अनाथ बच्चे का उदाहरण देते हुए आर्यिका आदित्य मति ने कहा कि अपना इतिहास मत भूलो और पांव ज़मीन पर रहे, ऐसा अहसास हमेशा होना चाहिए ।

इसके पूर्व धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका शरण मति माता ने कहा कि तनाव करने से नहीं परिश्रम से काम आसान होता है । पुण्य का उदय हो तो ग़लत कार्य होने पर भी सही समझा जाता है और उदय आ जाए तो सही काम को भी लोग ग़लत नजऱ से देखते हैं । धर्मसभा की शुरूआत में सुरभि जैन ने मंगलाचरण किया।

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