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इंसानियत के तीन किस्से, जो बताते हैं समाज में अभी सबकुछ खराब नहीं हुआ

समाज में एक ओर जहां विघटन और एकाकीपन के मामले अक्सर देखने और सुनने को मिल रहे हैं। ऐसे में शहर में तीन अलग-अलग जगह से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 04:05 AM IST

समाज में एक ओर जहां विघटन और एकाकीपन के मामले अक्सर देखने और सुनने को मिल रहे हैं। ऐसे में शहर में तीन अलग-अलग जगह से जुड़ी यह बातें खुद ही बयां करती हैं कि इंसानियत अब भी जिंदा है। साथ ही समाज में अभी सबकुछ खराब नहीं हुआ है। लोग एक-दूसरे की मदद के लिए न सिर्फ आगे आ रहे हैं, बल्कि बिन मांगे तक मदद दे रहे हैं। कोई घायल की मदद के लिए पैसे जुटा रहा है तो कई रास्ते में मिला पर्स लौटा रहा है। कई लोग मिलकर अपरिचित लड़की का विवाह ऐसे करा रहे हैं, जैसे उन्हीं की बेटी-बहन की शादी हो।

 पर्स मिला तो लौटाया, 4500 रु. नकद और 6 एटीएम कार्ड थे

प्राइवेट बैंक में कार्यरत कृष्णा नगर निवासी कपिल श्रीवास्तव ने भी इंसानियत की मिसाल पेश की। वे ऑफिस से चाय पीने के लिए आ रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक्सिस बैंक के सामने एक पर्स मिला। खोलकर देखा तो उसमें करीब 4500 रुपए नकद और 5-6 एटीएम कार्ड थे। इसे लेकर वे सीधे दैनिक भास्कर आए। पर्स से मिले मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो वाे देवरी निवासी आलोक पांडेय का निकला। पर्स भी उन्हीं का था। घर से 65 किलोमीटर दूर पर्स गुमने के कुछ ही देर बाद जब वह उन्हें वापस मिल गया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वे कपिल श्रीवास्तव को धन्यवाद देते हुए लौट गए।

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 लोगों ने मिलकर धूमधाम से कराई गरीब की बेटी की शादी

शहर के युवाओं ने गरीब परिवार की एक बेटी का विवाह अपने खर्च पर कराया। कुबेर शिष्य मंडल एवं सहयोगी मित्र मंडल ने अंबेडकर निवासी दीपा के विवाह में घरातियों की तरह हर जिम्मेदारी को निभाया। विवाह की पंगत, बारात आगमन से लेकर सात फेरों और विदाई तक सभी लोग ऐसी दौड़-भाग करते रहे मानो उन्हीं की बहन-बेटी की शादी हो। दीपा का विवाह सागर में ही धर्मेंद्र से हुआ है। मंडल के लोकमन चौधरी, बाटू दुबे बताते हैं कि सभी विवाह में सहभागी बनकर खुश हैं। धर्मेंद्र के परिजनों का कहना है कि लोगों को एक समधियाना मिलता है।हमें तो कई परिवार एक साथ मिल गए।

 एक्सीडेंट में घायल कैमरामैन की मदद के लिए जुटाए 1 लाख

तीसरा मामला एक्सीडेंट में घायल की मदद का है। पुरानी सदर निवासी फोटोग्राफर मयंक मौर्य शादी समारोह की शूटिंग के लिए बाइक से बेगमगंज जा रहे थे। भापेल के पास अचानक सड़क पर आए साइकिल चालक को बचाने के फेर में फिसल गए। उन्हें सिर में चोटें आईं। इलाज के लिए उन्हें इंदौर रैफर कर दिया। इलाज पर 5 लाख का खर्च है। उसकी पारिवारिक स्थिति जानते हुए मकरोनिया के कैमरामैन नितिन उपाध्याय व स्वतंत्र जैन ने लोगों से मदद की अपील की। खुद भी मदद की। जिले भर के कैमरामैन सहित अन्य लोग आगे आए अब तक करीब 1 लाख रुपए एकत्र कर चुके हैं। मयंक के 3 ऑपरेशन भी हो चुके हैं।

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Web Title: इंसानियत के तीन किस्से, जो बताते हैं समाज में अभी सबकुछ खराब नहीं हुआ
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