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मार्केट सब्जी-फल के लिए; बिकेगा पान मसाला, किराना और चाय

नया बाजार स्थित पुरानी सब्जी मंडी का मार्केट कॉम्पलेक्स बनकर तैयार है। कृषि उपज मंडी समिति द्वारा बनवाए गए इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 04:05 AM IST

मार्केट सब्जी-फल के लिए; बिकेगा पान मसाला, किराना और चाय
नया बाजार स्थित पुरानी सब्जी मंडी का मार्केट कॉम्पलेक्स बनकर तैयार है। कृषि उपज मंडी समिति द्वारा बनवाए गए इस मार्केट में फल वालों ने तो दुकान नहीं ली है लेकिन आसपास के बड़े व्यवसायियों ने जरूर एक-एक, दो-दो दुकानें ले ली हैं। ये वे व्यापारी हैं, जिनका सब्जी-फल के कारोबार से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है। इनमें से कुछ पाना मसाला के तो कुछ किराना के थोक व्यवसायी हैं। इस स्थिति में आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इनमें से अधिकांश दुकानें केवल गोडाउन बनकर रह जाएं। मंडी के इस कॉम्पलेक्स में कुल 40 दुकान बनाई गई हैं, इनमें से 33 का आवंटन हो चुका है। बाकी दुकान में से एक सीढ़ी के लिए छोड़कर 6 की जल्द ही नीलामी कराई जाएगी।

कीमतें इतनी अधिक थी कि फल-सब्जी विक्रेता खरीद नहीं पाए

सब्जी मंडी कॉम्पलेक्स में फल-सब्जी वालों द्वारा दुकान नहीं ले पाने का मुख्य कारण इनकी कीमत अधिक होना है। कॉम्पलेक्स की सबसे सस्ती दुकान की सरकारी कीमत 13 लाख और अधिकतम 34 लाख रुपए थी। नीलामी के बाद यह दुकानें 15-40 लाख रुपए तक में बिकीं। दुकान महंगी होने के पीछे मंडी समिति का तर्क है कि दुकानों की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर तय की गई इसलिए अधिक हो गई।

फल विक्रेताओं को मार्केट के भीतर शेड में जगह दी गई

दरअसल इस मार्केट कॉम्पलेक्स को बनाने की मुख्य वजह कटरा बाजार, मस्जिद के चारों तरफ फलों के ठेले लगाने वाले 40 छोटे व्यापारियों की शिफ्टिंग थी, लेकिन जब नीलामी हुई तो इनमें से एक भी ठेले वाला इन दुकानों को लेने आगे नहीं आया। बाद में यह मामला तत्कालीन कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने मंडी के भीतर एक शेड में इन सभी को एक-एक चबूतरा अलॉट करा दिया। जहां ये लोग अस्थाई तौर पर दुकान लगाकर फल बेच सकेंगे। मंडी ने इसके लिए उन्हें लाइसेंस जारी कर दिए हैं। अब केवल उन्हें रोजाना का मंडी शुल्क भर देना होगा।

दुकान लेने वालों में अधिकांश जैन और सिंधी समुदाय के व्यवसायी

नवनिर्मित कॉम्पलेक्स में दुकान लेने वाले अधिकांश व्यवसायी जैन और सिंधी समुदाय से हैं। खुली नीलामी होने के कारण केवल इसी वर्ग को दुकान दी गई, ऐसा कहना सही नहीं है। सरकारी नियमों के मुताबिक मंडी कमेटी ने 10 प्रतिशत दुकानें एससी-एसटी वर्ग के व्यवसायियों को रिजर्व करते हुए उन्हें आवंटित भी की हैं। जानकारी के मुताबिक जिन लोगों को दुकान मिली है, उनमें से प्रमुख नाम प्रकाश मनवानी-पान मसाला, राजकुमार दरयानी- थोक किराना और खाद्य तेल, सुमितकुमार जैन- किराना, मंजू जैन- कपड़ा, रितु फुलवानी-चाय पत्ती आदि के कारोबार से जुड़े हैं। फल व्यवसाय से जुड़े केवल एक ही व्यक्ति रघुवीर खटीक ने इस कॉम्पलेक्स में दुकान ली है।

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