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10 हजार की नौकरी; घर में मिली 30 लाख की ज्वेलरी, 30 बैंक खाते, 40 रजिस्ट्रियां, कुल ढाई करोड़ का आसामी

सागर. दुबे का घर जहां छापा मारा गया। दूसरे चित्र में कार्रवाई करती लोकायुक्त टीम। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:40 AM IST
सागर. दुबे का घर जहां छापा मारा गया। दूसरे चित्र में कार्रवाई करती लोकायुक्त टीम।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार अशोक कुमार दुबे 1987 में सहकारी समिति में सहायक प्रबंधक के पद पर नियुक्त हुए थे। वर्तमान में वह राहतगढ़ तहसील स्थित बेरखेड़ी सहकारी समिति में प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं। लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार सुबह 5 बजे इनके राजीव नगर स्थित आवास और गढ़ाकोटा स्थित पैतृक गांव बसाहरी में दबिश दी। पुलिस जब इनके घर पहुंची तब समिति प्रबंधक बेरखेड़ी में थे और घर पर उनकी प|ी व बच्चे थे। कार्रवाई में शामिल अफसरों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में काली कमाई से जमीन में काफी निवेश की जानकारी मिली है। इसके अलावा करोड़ों की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले। ऐसे में इतनी संपत्ति कहां से आई, इसकी जांच की जा रही है।

ऐसे समझें वेतन का गणित

2007 तक सहकारी समिति के प्रबंधक और सहायक प्रबंधक का वेतन 1500 से 2000 रुपए प्रति माह था। 2007 के बाद यह बढ़कर 5000 रुपए प्रतिमाह हुआ और 2016 से 10300 रुपए प्रतिमाह वेतन समिति प्रबंधकों को दिया जा रहा है। इस हिसाब से प्रबंधक की अब तक हुई सरकारी कमाई का अनुमान 15 लाख रुपए लगाया गया है।

पैतृक गांव में 49 एकड़ जमीन, सागर में कई स्थानों पर प्लाट

लोकायुक्त पुलिस की एक टीम प्रबंधक के गढ़ाकोटा स्थित बसाहरी गांव पहुंची थी, जहां 49 एकड़ जमीन, डेढ़ लाख के गहने और पुस्तैनी मकान की जानकारी मिली है। वहीं सागर में मकरोनिया, मोतीनगर और तिली में प्राइम लोकेशंस पर प्लाट होने की जानकारी सामने आई है। प्रबंधक की अधिकांश संपत्ति उनकी प|ी और बेटे और बेटी के नाम पर है।