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सोता हुआ व्यक्ति अर्ध मृत के समान है: आदित्मति

जब हम रात में सो जाते हैं तो सब कुछ छोड़ कर ही सोते हैं। ऐसे में यदि हमारा सब कुछ चला भी जाए तो नींद नहीं खुलती, इसीलिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 04:50 AM IST

जब हम रात में सो जाते हैं तो सब कुछ छोड़ कर ही सोते हैं। ऐसे में यदि हमारा सब कुछ चला भी जाए तो नींद नहीं खुलती, इसीलिए कहा जाता हैं कि सोता हुआ व्यक्ति अर्ध मृत के समान है । ये बात आर्यिका आदित्यमति माता ने सोमवार को तिलकगंज जैन मंदिर में चल रही धर्मसभा में व्यक्त किए हैं ।

उन्होंने कहा कि किसी को सोते में जगाते समय यह बात ध्यान रखना चाहिए कि जागने के बाद उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है, यदि वह क्रूर पशु की भांति हिंसा या उत्पात करता है तो इससे पाप के भागी आप भी होंगे ।

उन्होंने कहा कि शरीर को अपना मानना मूर्खता है। क्योंकि हम संसार में सिर्फ भ्रमण कर रहे हैं । हमारा संसार से कोई सरोकार नहीं है , फिर भी हम उसे अपना मान लेते हैं और संसार के दुखों को अपना मानकर दुखी रहते हैं ।

धन , जवानी व आयु ये क्षणिक सुख देते हैं और ये कमलिनी पर पड़ने वाली उस पानी की बूंद के समान है जिसका अस्तित्व क्षणिक होता है । हमारा कर्म ही हमें यश, कीर्ति व धन की प्राप्ति का कारण है । संसार में हमारे साथ हो रहा पक्षपात हमारे पूर्व कर्मों का परिणाम है । पुण्य की महिमा ही ऐसी है जो नौकर को सेठ बना दे या सेठ को नौकर की स्थिति में लाकर खड़ा कर दे । जीवन में कभी निराशा हो और ईश्वर के पास जाने का मन हो तो माता पिता के चरणों में जाकर सो जाना । माता पिता का शुभाशीष सफलता में सहारा बन जाता है । धर्मसभा के पूर्व मंच पर विराजमान आर्यिका आदित्यमति माता , आर्यिका शरण मति माता व आर्यिका करण मति माता को मूलचंद जैन , सुरेश संगम , नेमीचंद चौधरी व प्रेमचंद जैन ने शास्त्र भेंट किया।

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