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आर्यिका बृषभमति की डोल यात्रा में उमड़े हजारों श्रद्धालु, मंगलगिरी में दी गई अंतिम विदाई

आर्यिका विज्ञानमति माता की प्रथम शिष्या आर्यिका बृषभमति मंगलवार को तड़के 4.21 बजे ब्रम्ह मुहूर्त में ब्रम्हलीन हो...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 05:00 AM IST
आर्यिका बृषभमति की डोल यात्रा में उमड़े हजारों श्रद्धालु, मंगलगिरी में दी गई अंतिम विदाई
आर्यिका विज्ञानमति माता की प्रथम शिष्या आर्यिका बृषभमति मंगलवार को तड़के 4.21 बजे ब्रम्ह मुहूर्त में ब्रम्हलीन हो गई। एक महीने से असाध्य रोग का सामना कर रही बृषभमति माता ने पिछले दिनों जब अपनी गुरू मां आर्यिका विज्ञानमति माता से सानिध्य मिलने की इच्छा ज़ाहिर की तो गुरू मां भीषण गर्मी में सोनागिर से सागर आई। और तिलकगंज जैन मंदिर में 23 अप्रैल से लगातार अपनी शिष्या की सेवा में रात दिन मंत्र जाप और प्राकृतिक चिकित्सा से शिष्या के संल्लेखना संकल्प को पूरा कराया।

मंगलवार को जैसे ही सुबह 4.21 बजे आर्यिका बृषभमति ने अाखिरी सांस ली। सोशल मीडिया पर ख़बर के फैलने से माताजी की डोला यात्रा सुबह 7 बजे तिलकगंज जैन मंदिर से शुरू हुई। यात्रा वर्णी कॉलोनी , गुजराती बाज़ार , कटरा बाज़ार , तीनबत्ती , इतवारा बाज़ार , लक्ष्मीपुरा , पंतनगर , धर्मश्री होते हुए मंगलगिरी पहुंची।

एमएस गार्डन में विनयांजलि सभा कल

सागर | आर्यिका बृषभमति माता की विनयांजलि सभा 17 मई को सुबह 8 बजे तिलकगंज स्थित एमएस गार्डन में आयोजित की गई है। इसमें जैन समाज माता को श्रृद्धांजलि अर्पित करेगा।

ब्रह्मचारिणी बृषभमति ने 17 साल पहले संम्मेद शिखर में विज्ञानमति माता से ली थी दीक्षा। फाइल फोटो

दादा गुरू के समाधि दिवस पर आर्यिका की समाधि

आर्यिका विज्ञानमति माता ससंघ तिलकगंज में विराजमान हैं। मंगलवार सुबह आर्यिका विज्ञान मति के ग़ुरू विवेकसागर महाराज के भी गुरू आचार्य ज्ञानसागर महाराज का समाधि दिवस मनाया जाना था, इस दिन गुरूओं की आराधना के लिए चौंसठ रिद्धि विधान का आयोजन रखा गया था। लेकिन यह किसी के नहीं मालूम था कि दादा गुरू का समाधि दिवस मनाने के पूर्व ही स्वयं की समाधि हो जाएगी।

दादा गुरू के समाधि दिवस पर आर्यिका की समाधि

आर्यिका विज्ञानमति माता ससंघ तिलकगंज में विराजमान हैं। मंगलवार सुबह आर्यिका विज्ञान मति के ग़ुरू विवेकसागर महाराज के भी गुरू आचार्य ज्ञानसागर महाराज का समाधि दिवस मनाया जाना था, इस दिन गुरूओं की आराधना के लिए चौंसठ रिद्धि विधान का आयोजन रखा गया था। लेकिन यह किसी के नहीं मालूम था कि दादा गुरू का समाधि दिवस मनाने के पूर्व ही स्वयं की समाधि हो जाएगी।

इस दौरान संघ में समाधिस्थ आर्यिका बृषभमति के साथ गुरू माँ आर्यिका विज्ञानमति व उनकी संघस्थ आर्यिका आदित्य मति, आर्यिका पवित्रमति, आर्यिका शरदमति, आर्यिका चरणमति, आर्यिका करण मति, आर्यिका शरण मति, आर्यिका सुवीर मति, आर्यिका सुयशमति, आर्यिका उदित मति माता विराजमान थीं। आर्यिका माँ की अंतिम यात्रा नगर विधायक शैलेन्द्र जैन, महेश बिलहरा, सुरेन्द्र मालथौन, संतोष जैन, अशोक पिड़रूवा, वीरेंद्र मालथौन, आनंद स्टील, मुकेश ढाना, अनिल नैनधरा, सौरभ जैन, मनोज ताजपुर, चक्रेश सिंघई, राजेश कर्रापुर, रमेश जैन, मनीष जैन, महेन्द्र जैन, जयकुमार, बसंत मोदी, संजय जैन समेत मालथौन, केसली, टीकमगढ़, जताया, आरोन, शाहपुर, घुवारा, गुना, अशोकनगर, गुरसराय आदि स्थानों से हज़ारों की संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए ।

परिचय

पूर्व नाम-माधुरी दीदी

पिता- खेमचंद

मां - पूना बाई

जन्म- 1966(शाहपुर)

दीक्षा - ब्रह्मचर्य व्रत 1990 में सिवनी में आचार्य विद्यासागर महाराज से लिया था।

आर्यिका दीक्षा - विज्ञान मति माता से 18 नवंबर 2001 में संम्मेद शिखर में ली थी।

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