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कैंट में फर्जी दस्तावेज लगाकर लिया था सफाई का ठेका

कैंट बोर्ड ऑफिस में 7 साल पहले सफाई संबंधी एक ठेका फर्जी दस्तावेज पर ले लिया गया। यह खुलासा एक शिकायत के बाद कैंट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 05:05 AM IST

कैंट बोर्ड ऑफिस में 7 साल पहले सफाई संबंधी एक ठेका फर्जी दस्तावेज पर ले लिया गया। यह खुलासा एक शिकायत के बाद कैंट ऑफिस द्वारा कराई गई छानबीन के जरिए हुआ है। कैंट ऑफिस सूत्रों के मुताबिक सदर निवासी अरविंद चौकसे ने कुछ माह पहले एक शिकायत की थी।

उनका कहना था कि साल 2011-12 और 2012-13 के बीच कैंट एरिया में सफाई का ठेका मेसर्स साईं सुनील स्टोर एंड लेबर सप्लाई एजेंसी के पास थी। अरविंद का कहना है कि इस एजेंसी के संचालक सुनील चौकसे ने ठेके की अनुभव संबंधी शर्त की पूर्ति के लिए राहतगढ़ कृषि उपज मंडी में सफाई का काम करने का सर्टिफिकेट लगा दिया। जो जाली था। कैंट प्रशासन और बोर्ड ने इस दस्तावेज की जांच नहीं कराई और दो साल में करीब 88 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।

छानबीन में फर्जी निकला अनुभव प्रमाण-पत्र

जानकारी के मुताबिक कैंट प्रशासन काे राहतगढ़ कृषि मंडी प्रशासन ने जवाब दिया है कि मेसर्स सांई सुनील स्टोर के नाम से जारी सर्टिफिकेट मंडी कार्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं है। यहां बता दें कि इस सर्टिफिकेट पर जारीकर्ता के रूप में भाजपा नेता एवं तत्कालीन राहतगढ मंडी बोर्ड के अध्यक्ष सुधीर यादव के हस्ताक्षर हैं। इस मामले में सुधीर यादव से उनका पक्ष जानना चाहा तो कॉल रिसीव नहीं हुआ।

भविष्य निधि और ईएसआई का भी गबन किया, कैंट मौन रहा

शिकायकतकर्ता अरविंद का कहना है कि कैंट के इस करीब एक करोड़ रुपए के घोटाले में तत्कालीन सीईओ से लेकर बोर्ड के सदस्यों की भूमिका संदिग्ध है। फर्जीवाड़ा करने वाले इस ठेकेदार ने मजदूरों की भविष्य निधि और ईएसआई का पैसा भी जमा नहीं किया। दो साल तक कैँट ऑफिस भुगतान करता रहा लेकिन स्टाफ से लेकर बोर्ड के सदस्य-पदाधिकारी चुप्पी साधे रहे। चौकसे का कहना है कि मेसर्स सुनील ने नगर निगम सागर और मकरोनिया नपा में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा कर ठेके लिए है, जिसकी जांच होनी चाहिए।

मामला संज्ञान में है, आगामी बोर्ड मीटिंग में चर्चा के लिए रखेंगे

इस मामले में कैंट सीईओ अभिमन्युसिंह का कहना है कि मूलत: यह प्रकरण मेरे कार्यकाल से काफी पहले का है। लेकिन मैंने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों की गंभीरता से जांच कराई। अब जो भी जानकारी सामने आई है। उसे आगामी बोर्ड मीटिंग में रखा जाएगा। बोर्ड इस मामले में जो भी निर्णय लेगा, उसके आधार पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

मैंने स्वयंसेवी के रूप में काम किया, इसलिए रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं है

फर्जी दस्तावेज को लेकर आरोपों में घिरे साईं सुनील स्टोर के संचालक सुनील चौकसे का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाया गया आरोप झूठा है। दरअसल मैंने राहतगढ़ कृषि उपज मंडी में नि:शुल्क एवं स्वयंसेवा के रूप में साफ-सफाई का काम किया था जिसके लिए मुझे मंडी प्रशासन ने यह सर्टिफिकेट दिया। चूंकि मंडी में केवल उन्हीं कामकाज का रिकॉर्ड रहता है, जिसके लिए भुगतान किया गया हो। इसलिए मेरे सर्टिफिकेट का रिकॉर्ड नहीं मिला।

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