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सिटी बस प्रोजेक्ट: दो साल में तीन बार टेंडर, फिर भी नहीं मिले आॅपरेटर

Dainik Bhaskar

May 15, 2018, 05:10 AM IST

Sagar News - अमृत योजना के तहत अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए सिटी बस प्रोजेक्ट के तहत सोमवार को राज्य स्तरीय डेडिकेटेड अर्बन...

सिटी बस प्रोजेक्ट: दो साल में तीन बार टेंडर, फिर भी नहीं मिले आॅपरेटर
अमृत योजना के तहत अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए सिटी बस प्रोजेक्ट के तहत सोमवार को राज्य स्तरीय डेडिकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड से भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और विदिशा को बजट जारी कर दिया है। सागर शहर में सिटी बस ट्रांसपोर्ट बीते दो साल से अब तक अटका हुआ है।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर तैयार इस प्रोजेक्ट के लिए लोकल बस ऑपरेटर्स के साथ अधिकारियों की बैठकें जरूर हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए सहमति नहीं दी है। इसके चलते अब एक बार फिर नगर निगम, बस ऑपरेटर्स से चर्चा करेगा।

बताना मुनासिब होगा कि नगर निगम को सिटी बस संचालन के लिए 14 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल गई है। लेकिन इंटर और इंट्रा रूट के प्रस्ताव पर ऑपरेटर्स राजी नहीं हैं। वहीं छोटी बसों को शहर में चलाने पर उन्हें लाभ नहीं होने की बात भी सामने आई हैं। यही कारण है कि 2016 से 2018 के बीच तीन बार टेंडर होने के बाद भी प्रोजेक्ट फायनल स्टेज पर नहीं पहुंच पाया है। नगर निगम ने ऑपरेटर्स के सामने कई विकल्प भी रखें। लेकिन उन विकल्पों पर भी ऑपरेटर्स राजी नहीं हुए।

इस कारण अटका है प्रोजेक्ट




भास्कर संवाददाता | सागर

अमृत योजना के तहत अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए सिटी बस प्रोजेक्ट के तहत सोमवार को राज्य स्तरीय डेडिकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड से भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और विदिशा को बजट जारी कर दिया है। सागर शहर में सिटी बस ट्रांसपोर्ट बीते दो साल से अब तक अटका हुआ है।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर तैयार इस प्रोजेक्ट के लिए लोकल बस ऑपरेटर्स के साथ अधिकारियों की बैठकें जरूर हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए सहमति नहीं दी है। इसके चलते अब एक बार फिर नगर निगम, बस ऑपरेटर्स से चर्चा करेगा।

बताना मुनासिब होगा कि नगर निगम को सिटी बस संचालन के लिए 14 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल गई है। लेकिन इंटर और इंट्रा रूट के प्रस्ताव पर ऑपरेटर्स राजी नहीं हैं। वहीं छोटी बसों को शहर में चलाने पर उन्हें लाभ नहीं होने की बात भी सामने आई हैं। यही कारण है कि 2016 से 2018 के बीच तीन बार टेंडर होने के बाद भी प्रोजेक्ट फायनल स्टेज पर नहीं पहुंच पाया है। नगर निगम ने ऑपरेटर्स के सामने कई विकल्प भी रखें। लेकिन उन विकल्पों पर भी ऑपरेटर्स राजी नहीं हुए।

जल्द करेंगे बैठक

Ãसिटी बसों को लेकर अभी तक ऑपरेटर्स की ओर से किसी ने भी सहमति जाहिर नहीं की है। जल्द ही कलेक्टर, निगमायुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों व ऑपरेटर्स के साथ एक बैठक की जाएगी। इसमें प्रोजेक्ट को लेकर निर्णय लिए जाएंगे। - महापौर अभय दरे

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