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संभाग के 44 शासकीय महाविद्यालय में स्पोर्ट्स ऑफिसर ही नहीं, ग्रंथपाल के भी आधे पद खाली, इस साल होगी भर्ती

सागर संभाग के 48 में 44 सरकारी कॉलेज में स्पोटर्स ऑफिसर ही नहीं है। वहीं ग्रंथपाल के भी आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 05:10 AM IST

सागर संभाग के 48 में 44 सरकारी कॉलेज में स्पोटर्स ऑफिसर ही नहीं है। वहीं ग्रंथपाल के भी आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति केवल सागर संभाग की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों की है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के 457 कॉलेजों में लगभग 90 स्पोर्ट्स ऑफिसर और 115 ग्रंथपाल ही काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों में स्पोर्ट्स ऑफिसर और ग्रंथपाल के पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने का फैसला लिया है। दोनों के लिए 300-300 से ज्यादा पदों पर पीएससी से नियुक्तियां होंगी। जो असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के साथ ही चलेगी। खास बात यह है इन दोनों भर्तियों में भी साक्षात्कार की प्रक्रिया नहीं होगी।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तरह स्पोर्ट्स ऑफिसर और ग्रंथपाल के पद भी इस साल बगैर इंटरव्यू के ही भरे जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि दोनों पदों के भर्ती नियमों को लेकर पीएससी को तीन क्वेरीज हैं। शासन से उनका जवाब आते ही विज्ञापन जारी होगा। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग ने 2018 की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से इंटरव्यू हटा दिया है। चयन मैरिट के आधार पर होगा।

सागर संभाग के कई कॉलेजों में पद ही स्वीकृत नहीं

संभाग में कुल 48 शासकीय महाविद्यालय हैं, जिनमें स्पोर्ट्स ऑफिसर के कुल 44 पद स्वीकृत हैं। यानी चार कॉलेज ऐसे हैं जिनमें स्पोटर्स ऑफिसर के पद ही नहीं हैं। इनमें गर्ल्स कॉलेज बीना, शासकीय पीजी महाविद्यालय रहली, शासकीय पीजी महाविद्यालय गढ़ाकोटा और शासकीय राजीव गांधी महाविद्यालय बंडा के नाम शामिल हैं। यानी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इन कॉलेजों को स्पोर्ट्स ऑफिसर नहीं मिल पाएंगे।

अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहे कॉलेज

स्पोर्ट्स ऑफिसर और ग्रंथपाल नॉन टीचिंग पद हैं। सूत्रों के मुताबिक इनकी आखिरी भर्ती 2004 में हुई थी। तब से दोनों पदों पर अतिथि विद्वानों से काम लिया जा रहा है। जिले के आसपास ही आवेदन करने और कम वेतन के कारण अब अतिथि विद्वान के पद भी मुश्किल से भर पा रहे हैं। नतीजतन, कॉलेजों में खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है। विद्यार्थी अपने स्तर पर ही तैयारी करने को मजबूर हैं।

चयन के लिए बढ़ेगी स्पर्धा

भर्ती प्रक्रिया साक्षात्कार के बिना पूरी करने से इन पदों पर कॉम्पीटिशन बढ़ गया है। आवेदकों का कहना है कि मैरिट के साथ साक्षात्कार के अंक भी जुड़ते थे। तब फाइनल रिजल्ट बनता था। जो लोग परीक्षा में पिछड़ जाते थे। उनके पास साक्षात्कार में बेहतर करने का मौका होता था। अब सारी ताकत लिखित परीक्षा में ही झोंकना होगी। यानी जो मैरिट में बाजी मारेगा, नौकरी उसी के हाथ लगेगी।

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