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पानी की कीमत समझो और इसे बचा लो, आने वाली पीढ़ी पर यही तुम्हारा उपकार होगा: आर्यिका

पानी की फिजूल खर्ची से बचो, नहीं तो बीमार होने पर पानी मांगोगे और डॉक्टर पानी देने से मना कर देगा। अभी समय है। पानी...

Danik Bhaskar | May 12, 2018, 05:10 AM IST
पानी की फिजूल खर्ची से बचो, नहीं तो बीमार होने पर पानी मांगोगे और डॉक्टर पानी देने से मना कर देगा। अभी समय है। पानी की कीमत समझो और इसे बचा लो, भावी पीढ़ी पर यही तुम्हारा उपकार होगा। आर्यिका विज्ञानमति माता ने यह बात तिलकगंज जैन मंदिर में चल रही धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

आर्यिका ने कहा कि सहभोज के बड़े बड़े आयोजन हो रहे हैं और जूठन के नाम पर ढेर सारा अन्न फालतू फेंका जाता है । आजकल आधा ग्लास पानी पीना फैशन बन गया है। सफ़ाई के नाम पर हम लाखों लीटर पानी यूं ही बहा रहे हैं । सोचो यदि पानी नहीं मिलेगा तो अनाज कहां से पैदा होगा , इसीलिए अन्न जल की कीमत समझो और भोजन उतना लो थाली में कि व्यर्थ न जाए नाली में । उन्होंने धृतराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया कि जीवन में जो पंचेन्द्रिय के वशीभूत होकर रहता है , उसे भविष्य में नरक जैसा जीवन जीना पड़ सकता है । पंचेंद्रियों की लोलुपता ही हमारे दुखों का कारण है । जब तक इन्हें वश में नहीं करोगे , तब तक न घर में सुखी रहोगे न संसार में ।

आर्यिका ने कहा कि भारत में त्यौहार आदि जितनी भी परंपराएं हैं वे सब हमारे सम्यग्दर्शन को बचाने में सहायक हैं । मृत्यु सिर्फ़ पर्याय बदलना है । मोह के कारण हम तो दुखी रहते हैं लेकिन जिसकी पर्याय बदलती है , वो सुखी हो जाता है । यही तो संसार चक्र है पतझड़ में पत्ते सूखकर गिर जाते हैं और सावन में पेड़ हरा भरा हो जाता है । संयोग वियोग का नाम ही संसार है । समय रहते चेत जाने वाला ही अपना उद्धार कर सकता है । पंचेंद्रियों की पराधीनता में सुख कभी नहीं मिल सकता । धर्म सभा के पूर्व नेमीचंद चौधरी, अरविंद चौधरी , अंकित शास्त्री व कमल जैन ने आर्यिका संघ को शास्त्र भेंट किया । महेश बिलहरा, अशोक पिडरूआ व बांसवाड़ा राजस्थान से आए भक्तों ने श्री फल भेंट किया । संचालन महिमा जैन ने किया ।

सागर. आर्यिका आदित्य मती ने तिलकगंज जैन मंदिर में धर्मसभा संबोधित की।