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12वीं में फेल होने प

दो बहनों ने साथ दी थी परीक्षा, एक को फर्स्ट डिवीजन लेकिन साक्षी का रिजल्ट बिगड़ा, पूरे परिवार ने 48 घंटे तक रखा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 05:15 AM IST

12वीं में फेल होने प
दो बहनों ने साथ दी थी परीक्षा, एक को फर्स्ट डिवीजन लेकिन साक्षी का रिजल्ट बिगड़ा, पूरे परिवार ने 48 घंटे तक रखा ध्यान, लेकिन सारे प्रयास पलभर में फेल


12वीं में फेल होने पर खुदकुशी करने वाली साक्षी के परिवार में इस साल यही परीक्षा उसकी छोटी बहन देव्यंती ने भी दी थी। देव्यंती को फर्स्ट डिवीजन मिला जबकि साक्षी का रिजल्ट बिगड़ गया था। इसी बात से वह आहत थी।

पिता गोकुल प्रसाद अिहरवार ने भास्कर को बताया कि देव्यंती साक्षी से छोटी है, लेकिन मैंने स्कूल में दोनों बेटियों का दाखिला इसलिए साथ कराया था ताकि दोनों साथ मिलकर पढ़ें। लेकिन मुझे क्या पता था कि एक दिन यही कारण मेरे एक बेटी को दुनिया छोड़ने पर मजबूर कर देगा। 12वीं का रिजल्ट आने के बाद सारा परिवार साक्षी को समझाइश देने में जुटा रहा। कोई रुक जाना नहीं योजना की सलाह दे रहा था तो कोई असफलता के बाद भी सफल हुए लोगों की कहानी बताने में लगा था। रिजल्ट के बाद से लगातार 48 घंटे तक सारा परिवार साक्षी के साथ थे। लेकिन नहाने के बहाने साक्षी के बाथरूम में जाते ही सारी मेहनत फेल हो गई। कुछ देर बाद साक्षी का शव फंदे से लटका मिला।

यह पूरी घटना साक्षी के पिता गोकुल प्रसाद अहिरवार ने भास्कर को बताई। गोकुल प्रसाद की छह बेटियां और एक बेटा है। साक्षी का नंबर इनमें चौथा था। जब साक्षी का शव बीएमसी पहुंचा तो उसकी तीन बहनें भी साथ थी। बहनें अपनी लाड़ली का शव देखकर बिलख रहीं थी और उनकी जुबां पर एक ही शब्द था कि साक्षी तुम सेल्फिश निकलीं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद सानौधा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर, जांच शुरू कर दी है। पुलिस को छात्रा के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

बीएमसी में छात्रा के आत्महत्या कर लेने के बाद शोक में डूबी बहनें।

भास्कर संवाददाता | सागर

12वीं में फेल होने पर खुदकुशी करने वाली साक्षी के परिवार में इस साल यही परीक्षा उसकी छोटी बहन देव्यंती ने भी दी थी। देव्यंती को फर्स्ट डिवीजन मिला जबकि साक्षी का रिजल्ट बिगड़ गया था। इसी बात से वह आहत थी।

पिता गोकुल प्रसाद अिहरवार ने भास्कर को बताया कि देव्यंती साक्षी से छोटी है, लेकिन मैंने स्कूल में दोनों बेटियों का दाखिला इसलिए साथ कराया था ताकि दोनों साथ मिलकर पढ़ें। लेकिन मुझे क्या पता था कि एक दिन यही कारण मेरे एक बेटी को दुनिया छोड़ने पर मजबूर कर देगा। 12वीं का रिजल्ट आने के बाद सारा परिवार साक्षी को समझाइश देने में जुटा रहा। कोई रुक जाना नहीं योजना की सलाह दे रहा था तो कोई असफलता के बाद भी सफल हुए लोगों की कहानी बताने में लगा था। रिजल्ट के बाद से लगातार 48 घंटे तक सारा परिवार साक्षी के साथ थे। लेकिन नहाने के बहाने साक्षी के बाथरूम में जाते ही सारी मेहनत फेल हो गई। कुछ देर बाद साक्षी का शव फंदे से लटका मिला।

यह पूरी घटना साक्षी के पिता गोकुल प्रसाद अहिरवार ने भास्कर को बताई। गोकुल प्रसाद की छह बेटियां और एक बेटा है। साक्षी का नंबर इनमें चौथा था। जब साक्षी का शव बीएमसी पहुंचा तो उसकी तीन बहनें भी साथ थी। बहनें अपनी लाड़ली का शव देखकर बिलख रहीं थी और उनकी जुबां पर एक ही शब्द था कि साक्षी तुम सेल्फिश निकलीं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद सानौधा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर, जांच शुरू कर दी है। पुलिस को छात्रा के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

मां की बीमारी ठीक करने

के लिए साक्षी ने देखा था

डॉक्टर बनने का सपना

भाई शेखर ने बताया कि उनकी मां मस्तिष्क रोग से पीड़ित हैं। ऐसे में पिता पर हमारी पढ़ाई के साथ उनके इलाज की भी जिम्मेदारी है। लेकिन पिता ने प्राइवेट नौकरी करते हुए भी बहनों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजा बड़ी बहन इंजीनियर है और उससे छोटी भी इंजीनियरिंग स्टूडेंट। तीसरी बहन देव्यंती ने भी 12 वीं के बाद इसी फील्ड में जाने का सोच रही है। लेकिन साक्षी ने 11 वीं बायोलॉजी लेकर डॉक्टर बनने का सपना देखा था, ताकि वह अपनी मां का इलाज कर सके। लेकिन पहली ही असफलता ने उसे बुरी तरह निराश कर दिया और उसने इतना बड़ा कदम उठाया।

रिजल्ट आने पर भाई ने बोला था पास होने का झूठ

साक्षी के भाई शेखर ने बताया कि जब रिजल्ट में उसने साक्षी को फिजिक्स और केमेस्ट्री विषय में फेल देखा तो वह हैरान रह गया। लेकिन जब साक्षी ने फोन कर उससे रिजल्ट पूछा तो शेखर ने झूठ बोलते हुए कहा कि साक्षी तुम फर्स्ट डिवीजन पास हुई हो। दोनों बहनों के पास होने की खबर सुनते ही घर में खुशी का माहौल था, लेकिन जब कुछ देर बाद साक्षी को अपने दोस्तों से फेल होने की खबर मिली तो वह डिप्रेशन में चली गई।

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