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पुरुषोत्तम मास शुरू; गृह प्रवेश व भूमिपूजन बंद, 28 दिन होंगे केवल धार्मिक अनुष्ठान

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) बुधवार से शुरू हो चुका है। पंडितों के अनुसार यह 13 जून तक रहेगा। हर तीसरे वर्ष में अधिकमास...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 05:15 AM IST

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) बुधवार से शुरू हो चुका है। पंडितों के अनुसार यह 13 जून तक रहेगा। हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। इस अवधि में शुभ कार्य जैसे शादियां, गृह प्रवेश, मकान बनवाना, भूमिपूजन आदि नहीं किए जा जाते। लेकिन धार्मिक कार्य भागवत पारायण, कथा, लक्ष्मीनारायण महायज्ञ आदि के आयोजन कर सकते हैं।

पंडित रामगोविंद शास्त्री का कहना है कि इससे पहले वर्ष 2015 में दो आषाढ़ का अधिकमास था। अब वर्ष 2018 के बाद 2020 में अधिकमास होगा। खास बात यह है कि दो ज्येष्ठ वाला अधिकमास 10 साल बाद आ रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2007 में ज्येष्ठ में अधिकमास का योग बना था। इस दौरान भगवान विष्णु व पीपल के सामने दीप दान करने से रोग व बीमारी नष्ट होती है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। अधिकमास शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होकर कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन और 36 सेकंड में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य व पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढ़ने के कारण होता है।

ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन और सौरमास 365 दिन का

ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन व सौरमास 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो 3 साल में एक माह से कुछ ज्यादा होता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्मशास्त्रों में अधिकमास की व्यवस्था की गई है।

ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन और सौरमास 365 दिन का

ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन व सौरमास 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो 3 साल में एक माह से कुछ ज्यादा होता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्मशास्त्रों में अधिकमास की व्यवस्था की गई है।

भास्कर संवाददाता | सागर

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) बुधवार से शुरू हो चुका है। पंडितों के अनुसार यह 13 जून तक रहेगा। हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। इस अवधि में शुभ कार्य जैसे शादियां, गृह प्रवेश, मकान बनवाना, भूमिपूजन आदि नहीं किए जा जाते। लेकिन धार्मिक कार्य भागवत पारायण, कथा, लक्ष्मीनारायण महायज्ञ आदि के आयोजन कर सकते हैं।

पंडित रामगोविंद शास्त्री का कहना है कि इससे पहले वर्ष 2015 में दो आषाढ़ का अधिकमास था। अब वर्ष 2018 के बाद 2020 में अधिकमास होगा। खास बात यह है कि दो ज्येष्ठ वाला अधिकमास 10 साल बाद आ रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2007 में ज्येष्ठ में अधिकमास का योग बना था। इस दौरान भगवान विष्णु व पीपल के सामने दीप दान करने से रोग व बीमारी नष्ट होती है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। अधिकमास शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होकर कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन और 36 सेकंड में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य व पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढ़ने के कारण होता है।

मान्यता है कि हिरण्यकश्यप के वध के लिए बनाया अधिकमास

पंडित शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार अधिकमास के पीछे हिरण्यकश्यप का वध माना जाता है। हिरण्यकश्यप ने अपनी तपस्या से दो वरदान मांगा था, जिसमें यह भी कहा था कि पंचांग के 12 महीने में उसे न कोई धरती पर मार सकें, न आसमान में। न शस्त्र न अस्त्र, न स्त्री पुरुष। इसी के कारण भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लिया और एक महीने का अधिकमास बनाकर उसका वध किया।

विवाह, प्रतिष्ठा आदि कार्य वर्जित

अधिकमास में प्रतिष्ठा, कर्म, विवाह आदि मंगल कार्य वर्जित हैं।

व्रत, दान, उपवास, पारायण आदि कार्य का अक्षय पुण्य मिलता है।

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