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ईपीएफ में गड़बड़ी; विवि पर निकली 60 लाख की रिकवरी, नोटिस

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में ईपीएफ फंड के नाम पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विवि के जिम्मेदार अफसरों ने 38...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 05:15 AM IST
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में ईपीएफ फंड के नाम पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विवि के जिम्मेदार अफसरों ने 38 कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की राशि काटी, लेकिन इसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के फंड में जमा नहीं कराया। नतीजा जब कर्मचारी अपना ईपीएफ निकालने के लिए ईपीएफओ कार्यालय पहुंचे तो उनके खाते में कोई राशि ही जमा नहीं थी। मामले का खुलासा होने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अफसरों ने इसकी जांच शुरू की और विवि को 60 लाख रुपए की रिकवरी का नोटिस जारी किया है। अब 15 दिन के भीतर विवि को यह राशि जमा कराना है।

नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों की शिकायत से हुआ खुलासा

वर्ष 2016 में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पारिश्रमिक दर पर 22 कर्मचारियों को रखा गया था। कर्मचारियों के वेतन से 12 फीसदी ईपीएफ और 13.61 फीसदी यूसीपीएफ की कटौती किया जाना निर्धारित हुआ था, जिसके लिए विवि में नोटशीट भी चली। करीब एक साल तक इन कर्मचारियों से काम लेने के बाद विवि ने इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसकी लड़ाई आज भी यह कर्मचारी लड़ रहे हैं। इसी दौरान जब कर्मचारियों वेतन से काटी गई ईपीएफ राशि लेने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में आवेदन किया तो सामने आया कि उनके वेतन से हर माह ईपीएफ और यूसीपीएफ के नाम पर पैसे काटे तो गए लेकिन वह आज तक ईपीएफ फंड में जमा ही नहीं हुए। जिसके बाद कर्मचारियों ने मामले की शिकायत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय में की।

दस्तावेजों की जांच के बाद जारी हुआ नोटिस

शिकायत मिलने के बाद ईपीएफओ कार्यालय से 2017 में विवि को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। दस्तावेज मिलने के बाद अफसरों द्वारा मामले की जांच की गई। जिसमें 22 नहीं बल्कि 38 कर्मचारियों का ईपीएफ जमा न करने का मामला सामने आया। जिसके बाद संगठन ने 10 मई 2018 को विवि को नोटिस जारी करते हुए 6066842 रुपए की रिकवरी निकाली है।

Ãविश्वविद्यालय द्वारा कर्मचारियों का ईपीएफ न भरने की जानकारी हमें मिली थी, जिसके बाद विवि से दस्तावेज मंगाए गए। दस्तावेजों की जांच के आधार पर विश्वविद्यालय को 60 लाख रुपए का रिकवरी का नोटिस जारी किया गया है। उन्हें यह राशि जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। - वैभव डोगलीकर, सहायक आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन