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बच्ची के साथ जंगली जानवर जैसा कृत्य किया, उसे अधिकतम सजा देना उचित

तीन माह चार दिन की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के एक दोषी को इंदौर की जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। दोषी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 05:15 AM IST

बच्ची के साथ जंगली जानवर जैसा कृत्य किया, उसे अधिकतम सजा देना उचित
तीन माह चार दिन की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के एक दोषी को इंदौर की जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। दोषी नवीन उर्फ अजय गड़के को बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के लिए दो अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई गई है। बच्ची का शव 20 अप्रैल को मिला था। घटना के 23वें दिन कोर्ट ने दोषी को सजा सुना दी। ट्रायल 21 दिन में पूरा हो गया था। पाॅक्सो कोर्ट में रोज इस केस की सात-सात घंटे सुनवाई हुई। 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा का अध्यादेश लागू होने के बाद यह पहला फैसला है। अपर सत्र न्यायाधीश वर्षा शर्मा ने कहा, ‘अपराधी ने जिस तरह जघन्य और क्रूरता से जंगली जानवर जैसा कृत्य किया, उसे देखते हुए अधिकतम दंड देना उचित है, ताकि समाज में ऐसे कृत्य की पुनरावृत्ति न हो।’ दोषी नवीन को सुबह साढ़े 10 बजे कोर्ट में लाया गया था। वह कटघरे में आराम से बैठा रहा। शेष पेज 10 पर

उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था। हालांकि, फांसी की सजा सुनकर उसके चेहरे पर थोड़ा तनाव दिखा। फांसी की सजा पुष्टि के लिए हाईकोर्ट को भेजा जाएगा। हाईकोर्ट सजा को यथावत रखने या उसे बदलने पर फैसला करेगा। सजा बरकरार रहने की स्थिति में दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकेगा। वहां से भी फांसी कायम रही तो राष्ट्रपति के यहां दया याचिका लगा सकता है।

इतनी छोटी बच्ची से ज्यादती का देश में पहला मामला

विशेष लोक अभियोजक मो. अकरम शेख के मुताबिक ट्रायल के दौरान सैकड़ों न्यायदृष्टांत खंगाल लिए, इंटरनेट पर अलग-अलग तरीके खोज की, लेकिन इतनी छोटी बच्ची से ज्यादती का मामला कहीं पता नहीं चला। ट्रायल के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश को भी इसके बारे में बताया कि इतना विरलतम मामला देश में कहीं नहीं हुआ।



डीएनए व पीएम रिपोर्ट ने दी मजबूती

सागर स्थित राज्य न्यायालयिक फोरेंसिक लेबोरेटरी से प्राप्त डीएनए रिपोर्ट में पाया गया था कि पुलिस द्वारा जब्त आरोपी की टी शर्ट, पेंट, साइकिल के हैंडल पर जो खून मिला वह मृत बच्ची का था। साथ ही बच्ची के फ्रॉक पर पाए गए शुक्राणु आरोपी के पाए थे। अदालत में पोस्ट मार्टम करने वाले एमवाय के डॉ. प्रशांत राजपूत व डा. पूनम माथुर ने पुष्टि की कि बच्ची के साथ लैंगिक हमला हुआ था।



इन धाराओं में सजा

आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) - फांसी।

धारा 302 (हत्या) - फांसी और 5 हजार रु. जुर्माना।

पॉक्सो एक्ट- 2012 की धारा 5 (एम) (आई) 6 के तहत उम्रकैद, 5 हजार रु. जुर्माना।

अपहरण के लिए धारा 366 (क) के तहत 7 साल की कैद और 363 के तहत पांच वर्ष की कैद।

हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए धारा 201 के तहत पांच वर्ष की कैद एवं पांच हजार रुपए जुर्माना।



सजा सुनाए जाने से पहले भी अपराध कबूल नहीं किया

जज वर्षा शर्मा ने दोषी से जब कहा कि कोर्ट तुम्हें दोषी मानता है। तुम्हें कम से कम सजा मिले, इसके लिए कुछ कहना चाहते हो? उसने कहा कि मैंने न तो बच्ची को उठाया, न ही उसकी हत्या की। आपको जो सजा देनी है दे दें।

इंदौर में तीन माह चार दिन की बच्ची के दुष्कर्मी और हत्यारे को 23 दिन बाद दोहरी फांसी और उम्रकैद

दोषी की प|ी की गवाही और सीसीटीवी फुटेज से पुख्ता सबूत मिले

सजा से पहले अंतिम तर्क

न्यायालय- कोर्ट तुम्हें दोषी मानती है। कुछ कहना चाहते हो ?

आरोपी नवीन- मैने ना तो बच्ची को उठाया, ना ही हत्या की। आपको जो सजा देनी है दे दीजिए।

आरोपी का वकील- नवीन आदतन अपराधी नहीं है। सजा में नरमी बरतें।

विशेष लोक अभियोजक- क्या उसके आदतन अपराधी होने का इंतजार किया जाए। बच्ची इतनी मासूम थी कि रोने के सिवाए कुछ भी नहीं जानती थी। फांसी से कम सजा दी तो यह न्याय नहीं होगा।

दोषी नवीन

बच्ची की मां के अलावा आरोेपी नवीन की प|ी रेखा बाई ने उसे कोर्ट में पहचाना। रेखा ने सीसीटीवी फुटेज से पहचान करते हुए कहा था कि बच्ची को ले जाने वाला उसका पति ही है। इस केस में तीन सीसीटीवी फुटेज थे। पहला फुटेज सरकारी कैमरे का था। इसमें आरोपी माता-पिता के पास सो रही बच्ची उठाते दिखा है। दूसरे में वह साइकिल पर बच्ची को ले जा रहा है। एक निजी संस्थान के सीसीटीवी फुटेज में अपराधी हाथ में बच्ची को पकड़े दूसरे हाथ से साइकिल पैदल लेकर जा रहा है। एक अन्य फुटेज में वह अकेला लौटता दिखा है।

मौत का हकदार ही था

मेरी बच्ची कितना चीखी, चिल्लाई होगी। वह तो भूख लगने पर ही रोती थी। जब दरिंदा उसे नोंच रहा होगा तो उस पर क्या बीत रही होगी। उसने मेरी बच्ची को मारा उसे तो मौत मिलना ही चाहिए थी।’ -बच्ची की मां

बहन आई पर मिली नहीं

आरोपी नवीन की बहन ग्वालियर से आई थी। नवीन ने उसे देखा था, लेकिन बहन उससे बिना मिले ही चली गई। नवीन के परिजन भी उसे कोर्ट में खड़ा देख वहां से चले गए।

सबसे तेज : 2006 में 9 दिन में बिट्टी मोहंती को सुना दी थी सजा

रेप केस में सबसे कम दिन की सुनवाई में सजा सुनाने का रिकॉर्ड जयपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम है। कोर्ट ने 12 अप्रैल 2006 को ओडिशा के पूर्व डीजीपी बीबी मोहंती के बेटे बिट्टीहोत्रा मोहंती को मात्र 9 दिन की सुनवाई के बाद सात साल की सजा सुनाई थी। मामले में बिट्टी को 21 मार्च 2006 को गिरफ्तार किया गया। शेष पेज 10 पर

उस पर दिल्ली में पढ़ाई कर रही 26 वर्षीय जर्मन महिला से राजस्थान के अलवर के एक होटल में दुष्कर्म करने का आरोप था। केस की सुनवाई 3 अप्रैल को शुरू हुई थी और 12 को इस पर फैसला आ गया था।

-वर्षा शर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश

छह साल में इंदौर में तीन को फांसी की सजा, फैसला सुनाने वाली तीनों न्यायाधीश महिला

यह एक संयोग है कि पिछले छह साल में इंदौर में ज्यादती और हत्या के तीन मामले हुए। तीनों मामलों में आरोपियों को फांसी महिला न्यायाधीश ने ही सुनाई। राजीव आवास विहार में हुए शिवानी हत्याकांड के आरोपियों को न्यायाधीश सविता सिंह, पंचम की फेल से शिवानी के अपहरण, ज्यादती और हत्या के आरोपियों को न्यायाधीश इंद्रासिंह ने फांसी दी थी। इसके बाद शनिवार को न्यायाधीश वर्षा शर्मा ने सजा सुनाई।

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