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बच्चों के साथ मित्रवत संबंध होगा तो ही वे आपसे मन की बात शेयर करेंगे: आर्यिका

जिस तरह से समाज में लोगों का चारित्रिक पतन हो रहा है। उसका दुष्प्रभाव हमारी भावी पीढ़ी पर हो रहा है। इसलिए समाज को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 05:25 AM IST

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    जिस तरह से समाज में लोगों का चारित्रिक पतन हो रहा है। उसका दुष्प्रभाव हमारी भावी पीढ़ी पर हो रहा है। इसलिए समाज को चैत्यालय यानि मंदिर के निर्माण से ज़्यादा चरित्र निर्माण की जरूरत है । यह बात आर्यिका आदित्य मति माता ने तिलकगंज जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा में कही।

    उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मित्रवत संबंध हो तो वो कोई भी बात छिपाने की बजाय आपसे शेयर करेगा जब भी कोई बेटा या बेटी जिज्ञासा लेकर अपने माता पिता के पास आता है और यदि माता पिता उस पर ध्यान नहीं देते हैं। तो वह अपना समाधान समाज के बीच ढूंढ़ते हैं और समाज में वो पतन का मार्ग चुन लेते हैं । बच्चों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों को कभी न टालें। उनका नैतिक पतन न हो पाए इसकी जिम्मेदारी हमारी है। हम उन्हें सत्संग में लेकर जाएं और कभी-कभी संकल्प के साथ जीवन जीने का कला भी बताएं। आदर्श महा पुरुषों की जीवनी हमारे जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होती है।

    आर्यिका ने बताया कि माता पिता का दायित्व है कि वो सही समय पर अपने बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएं। यदि पिता अपने पुत्र को मार्गदर्शन देना चाहे या अपराध बोध कराना चाहे तो उसके साथ मित्रवत् संवाद होना चाहिए । बेटियों के साथ हो रहे अपराधों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माता पिता को हमेशा ध्यान रखना है कि बेटियों को दिन चर्या क्या है और कभी वो मानसिक रूप से परेशान हों तो उनको समय दें और मां का कर्तव्य है कि वो बेटी की एक सहेली बने। घर से बाहर पढ़ने वाले बच्चों को बार बार यह अहसास कराएं कि वो कैरियर बनाने गए हैं चौपट करने नहीं। धर्म सभा में प्रकाश मरैया राकेश शाह व सुरेश संगम ने शास्त्र भेंट किया। वीरेंद्र मालथौन, अरविंद चौधरी बसंत मोदी ने श्रीफल भेंट किया।

    भास्कर संवाददाता | सागर

    जिस तरह से समाज में लोगों का चारित्रिक पतन हो रहा है। उसका दुष्प्रभाव हमारी भावी पीढ़ी पर हो रहा है। इसलिए समाज को चैत्यालय यानि मंदिर के निर्माण से ज़्यादा चरित्र निर्माण की जरूरत है । यह बात आर्यिका आदित्य मति माता ने तिलकगंज जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा में कही।

    उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मित्रवत संबंध हो तो वो कोई भी बात छिपाने की बजाय आपसे शेयर करेगा जब भी कोई बेटा या बेटी जिज्ञासा लेकर अपने माता पिता के पास आता है और यदि माता पिता उस पर ध्यान नहीं देते हैं। तो वह अपना समाधान समाज के बीच ढूंढ़ते हैं और समाज में वो पतन का मार्ग चुन लेते हैं । बच्चों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों को कभी न टालें। उनका नैतिक पतन न हो पाए इसकी जिम्मेदारी हमारी है। हम उन्हें सत्संग में लेकर जाएं और कभी-कभी संकल्प के साथ जीवन जीने का कला भी बताएं। आदर्श महा पुरुषों की जीवनी हमारे जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होती है।

    आर्यिका ने बताया कि माता पिता का दायित्व है कि वो सही समय पर अपने बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएं। यदि पिता अपने पुत्र को मार्गदर्शन देना चाहे या अपराध बोध कराना चाहे तो उसके साथ मित्रवत् संवाद होना चाहिए । बेटियों के साथ हो रहे अपराधों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माता पिता को हमेशा ध्यान रखना है कि बेटियों को दिन चर्या क्या है और कभी वो मानसिक रूप से परेशान हों तो उनको समय दें और मां का कर्तव्य है कि वो बेटी की एक सहेली बने। घर से बाहर पढ़ने वाले बच्चों को बार बार यह अहसास कराएं कि वो कैरियर बनाने गए हैं चौपट करने नहीं। धर्म सभा में प्रकाश मरैया राकेश शाह व सुरेश संगम ने शास्त्र भेंट किया। वीरेंद्र मालथौन, अरविंद चौधरी बसंत मोदी ने श्रीफल भेंट किया।

    तिलकगंज दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को आर्यिका आदित्यमति माता और अन्य आर्यिकाओं ने श्रोताओं को समाज और जीवन में उपयोगी बातें प्रवचन के दौरान बताईं।

    भास्कर संवाददाता | सागर

    जिस तरह से समाज में लोगों का चारित्रिक पतन हो रहा है। उसका दुष्प्रभाव हमारी भावी पीढ़ी पर हो रहा है। इसलिए समाज को चैत्यालय यानि मंदिर के निर्माण से ज़्यादा चरित्र निर्माण की जरूरत है । यह बात आर्यिका आदित्य मति माता ने तिलकगंज जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा में कही।

    उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मित्रवत संबंध हो तो वो कोई भी बात छिपाने की बजाय आपसे शेयर करेगा जब भी कोई बेटा या बेटी जिज्ञासा लेकर अपने माता पिता के पास आता है और यदि माता पिता उस पर ध्यान नहीं देते हैं। तो वह अपना समाधान समाज के बीच ढूंढ़ते हैं और समाज में वो पतन का मार्ग चुन लेते हैं । बच्चों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों को कभी न टालें। उनका नैतिक पतन न हो पाए इसकी जिम्मेदारी हमारी है। हम उन्हें सत्संग में लेकर जाएं और कभी-कभी संकल्प के साथ जीवन जीने का कला भी बताएं। आदर्श महा पुरुषों की जीवनी हमारे जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होती है।

    आर्यिका ने बताया कि माता पिता का दायित्व है कि वो सही समय पर अपने बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएं। यदि पिता अपने पुत्र को मार्गदर्शन देना चाहे या अपराध बोध कराना चाहे तो उसके साथ मित्रवत् संवाद होना चाहिए । बेटियों के साथ हो रहे अपराधों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माता पिता को हमेशा ध्यान रखना है कि बेटियों को दिन चर्या क्या है और कभी वो मानसिक रूप से परेशान हों तो उनको समय दें और मां का कर्तव्य है कि वो बेटी की एक सहेली बने। घर से बाहर पढ़ने वाले बच्चों को बार बार यह अहसास कराएं कि वो कैरियर बनाने गए हैं चौपट करने नहीं। धर्म सभा में प्रकाश मरैया राकेश शाह व सुरेश संगम ने शास्त्र भेंट किया। वीरेंद्र मालथौन, अरविंद चौधरी बसंत मोदी ने श्रीफल भेंट किया।

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